एक दूसर बर प्रेम अऊ त्याग के सन्देश देथे ईद-उल-अजहा

समाज म एक दूसर बर त्याग या क़ुरबानी के जज़्बा पैदा करइया तिहार ईद-उल-अजहा पैग़म्बर हज़रत इब्राहीम अऊ ऊंखर बेटा हज़रत इस्माईल के क़ुरबानी के जज़्बा के यादगार ये। ये तिहार हिजरी कैलेंडर के ग्यारहवां महीना ज़िलहिज के दस तारीख़ को मनाए जाथे। माने जाथे के हज़रत इब्राहीम ह ख़्वाब म देखे रहिन के वो अपन बेटा इस्माईल ल अल्लाह के राह म क़ुर्बान करत हें। पैग़म्बर इब्राहीम ये ख़्वाब देख के अपन बेटा ल सच म अल्लाह बर क़ुर्बान कर देहे ल तैयार हो गए रहिन।
अल्लाह ह ऊंखर क़ुरबानी के जज़्बा ल पसंद करिन अऊ हज़रत इस्माईल के जघा एक दुंबा क़ुर्बान हो गीस। तब ले हर साल हज़रत इब्राहीम अऊ ऊंखर बेटा के इही क़ुरबानी के जज़्बा ल याद करे जाथे। ईद-उल-अजहा के दिन मुस्लमान विशेष नमाज़ अदा करथें।
ईद-उल-अजहा एक दूसर बर त्याग करे जज़्बा ल मज़बूत करे के सन्देश देथे। हम अक्सर अपन हित मन तक सिमट के दूसर मन बर क़ुरबानी या त्याग के कोनो भावना ले बेपरवाह हो जाथन। कहूं हम आपस म एक दूसर बर त्याग, प्रेम अऊ अपनाइयत के जज़्बा मज़बूत करबो त समाज म इंसान के दरम्यान ताल्लुक़ के डोर ज़्यादा मज़बूत हो सकही।

लउछरहा..