हज़रत मोहम्मद के जनम के खुशी म ईद मिलाद के आयोजन

आज ईद-मिलाद-उन-नबी हे। इस्लामी कैलेंडर के तीसर महीना, रबीउल अव्वल के बारह तारीक ल पैगम्बरे इस्लाम हज़रत मोहम्मद के जनम अरब के जमीन मक्का म होय रहिस। हज़रत मोहम्मद के जन्म के अवसर म पूरा दुनिया म मुसलमान इस्लाम के आखरी पैगम्बर ल सुरता करथें।
मनखे मन ल सीरत अऊ चरित्र के निर्माण बर नैतिकता के शिक्षा देवइया हज़रत मोहम्मद पैगंबर के जन्म मक्का म ओ समय होय रहिस जब पूरा अरब गंभीर नैतिक संकट म रहिस। जऊन साल पैगंबर हज़रत मोहम्मद के जन्म होइस वो साल विजय अऊ समृद्धि के साल म बदल गीस।
रबीउल अव्वल महीना के बारा तारीक के दिन पैगम्बरे इस्लाम हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के जन्म के खुशी म पूरा इस्लामी दुनिया म इद मिलाद आयोजित करे जाथे। ए अवसर म जुलूस निकाले जाथे अऊ नाराए रिसालत बुलंद करे जाथे।
हज़रत मुहम्मद के आचरण अतका बुलंद रहिस के संगवारी तो संगवारी दुश्मन घलोक उंखर ले प्रभावित होए बिना नइ रहि पात रहिस। दुश्मन मन ल माफ कर देना, गुलाम अऊ कनीज़ मन ले अच्छा व्यवहार करना, बीमार मन के देख भाल करना, निर्बल मन अऊ सियान मन ल सहारा देना अऊ अपन पराए सबो के संग प्रेम अऊ नम्रता के बर्ताव करे के अनगिनत उदाहरण हज़रत मुहम्मद के जीवन म मिलथे। हज़रत मोहम्मद के पूरा जीवन मानवता के नाम रहिस ऊंखर आचरण हमला दूरी मन ल मिटाय अऊ आपसी भाई चारा ल बढ़ावा देहे के शिक्षा देथे।

लउछरहा..