चुनई चुटकुला : सोमनाथ के अगोरा हे

बिहिनिया ले कका ल कमण्डल धरे घूमत देखत रहेंव। मोर मन नइ माड़िस, पूछ परेंव:- ‘कस कका बिहिनिया के ए कमण्डल धरे कहाँ घूमत हस? काय खोजत हस गा?’
कका कहिस:- ‘का बतावव बुजा ल रे। मैं जऊन-जऊन ल बने सोचत-जानत अउ मानत रहेंव उही मन कोनो नागनाथ निकलगे कोनो साँपनाथ। इंकर जहर उलगई ले परेसान होगेंव।’
थोकन जंभा के कका कहिस-
‘अब मोला सोमनाथ के अगोरा हे बाबू।’
– धर्मेन्द्र निर्मल

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