आज्ञाराम वर्मा के पांच गुना सस्ता कंबाइन मसीन

खेत मन के छोटे-छोटे डोली अउ सांकुर गली-खोर के सेती बड़का ट्रेक्‍टर ल खेत तक लेगे म कभू-कभू बड़ दिक्‍कत होथे। कई पईत खेत के रद्दा म झुंझकुर पेड़ होथे अइसन म खेत मन तक बड़का कृषि यंत्र मन ल ले जाना मुश्किल होथे। खेती म काम अवइया जोतई, बोवई, मिंजइ मन के कृषि यंत्र अलग-अलग फसल मन बर अलग-अलग तको होथे। किसान मन के इही दिक्‍कत ल देखत उत्तर प्रदेश के बस्ती जिला के विकास खंड कप्तानगंज के गांव खरकादेवरी के रहइया 12वीं तक पढ़े नवाचारी किसान आज्ञाराम वर्मा…

ए प्रजाति के छेरी (बकरी) पालन करके किसान कर सकत हें लाखों के कमई

खेती के संगे-संग पशुपालन ह किसान के आय के प्रमुख स्रोत हे। जेमां डेयरी बर गाय, भंइस पाले जाथे त उन्‍हें मांस बर कुकरी (मुर्गी), छेरी (बकरी) अउ भेड़ प्रमुख हे। अभी हाल के बेरा म, समे ल देखत किसान मन ह पशुपालन ल अपन मुख्य आय के स्रोत बनावत हें। जेखर से कम जमीन म घलोक अच्छा आमदनी होथे। सबले बड़े बात ये हे के एकर बर न बाजार किंदरे ल रय अउ ना बेंचे बर कहूं दूरिहा जाय ल परय। पशुपालन करइया किसान मन बताथें के छेरी (बकरी)…

किसान के अजब जुगाड़, घास कटइया मसीन ल बना दीस धान काटे के मसीन

जेरोम सोरेंगे को-ऑपरेटिव कॉलेज अऊ वर्कर्स कॉलेज म मनोविज्ञान के प्रोफेसर रहिस हे। रिटायरमेंट के बाद उमन बालीगुमा गोड़गोड़ा म फार्म हाउस खोलिन। इहां ओ मन सूरा, कुकरी, ऐमु अऊ मछरी पालन करथें। थोकन जमीन म खेती-बाड़ी घलोक हे। ओला मजदूर मन के कमी के सेती खेत म धान लुवाए बर बहुत परेशानी होत रहिस। एखर बर वो दिमाग लगात रहिस फेर धीरे-धीरे वो ह धान काटे के एक ठन मसीन बनाइस। ये मसीन ल ओ ह मवेशी ल खवाए बर जउन चारा काटे के हेच कटर रहिस तेकरे से…