जनकवि कोदूराम “दलित” जी के 109 वाँ जयंती : छत्तीसगढ़ के परम्परा अउ संस्कृति के प्रमान

आज सुख-सुविधा के नवा दौर मा जिहाँ पढ़े-लिखे बेटा मन अपन जीयत-जागत बाप ला नइ सरेखें उहाँ छत्तीसगढ़ के नानकुन गाँव टिकरी (अर्जुन्दा) के ग्रामवासी मन जब अपन गाँव के माटी मा 109 बछर पहिली एक किसान परिवार मा जन्मे कवि कोदूराम “दलित” के सुरता मा कविसम्मेलन के आयोजन करहीं त छत्तीसगढ़ के परम्परा अउ संस्कृति ऊपर भरोसा कइसे नइ होही? छत्तीसगढ़िया मन के अइसन बिसेसता दुनिया भर मा बिरला देखे बर आही।
05 मार्च 2019 के बालोद जिला के नानकुन गाँव टिकरी हर, जनकवि कोदूराम “दलित” जी के सुरता मा निमगा साहित्यिक कविसम्मेलन के आयोजन करके एक नवा इतिहास गढ़ दिस। ये मंच मा जनकवि लक्ष्मण मस्तुरिया जी ला घलो सुरता करके काव्यांजलि अरपन करे गिस। आजकल के कविसम्मेलन के बड़े-बड़े मंच मा शिष्ट हास्य-व्यंग्य के जघा चुटकुलाबाजी होवत हे, वीर रस के नाव मा भावना भड़काए वाले चिल्ल-पों चलत हे अइसन दौर मा गीत, गजल अउ छन्द के रस-गंगा तइहा के जमाना के सुरता देवा दिस।
कविसम्मेलन के माई पहुना गुण्डरदेही के विधायक माननीय कुँअर सिंह निषाद रहिन। सुप्रसिद्ध रंगकर्मी दाऊ दीपक चंद्रकार के अध्यक्षता म आयोजित ये ऐतिहासिक कविसम्मेलन के संचालन अर्जुन्दा के गीतकार, कवि मिथिलेश शर्मा “निसार” जी करिन। ग्राम टिकरी के कवि लोचन देशमुख अपन टिकरी के माटी के कन कन म गीत बसे के प्रमान देवत कवि सम्मेलन के शुरुवात करिन।
रायपुर से पधारे छत्तीसगढ़ के मयारुक कवि गीतकार मीर अली मीर मन पहिली दौर म मोर छत्तीसगढ़ महतारी जइसन सुपर हिट गीत गा के वातावरण ला गीतमय बनावत बेटी ऊपरपर अपन मार्मिक गीत
“ककरो बेटी झन गँवाए संगवारी
नइ ते भुइयाँ के भगवान रिसा जाही”
सुनाइन अउ जम्मो सुनइया मन के आँखी ला भिगोया दिन।
पैरी गाँव ले पधारे अउ राष्ट्रपति पुरस्कार ले सम्मानित शिक्षक कवि सीताराम साहू “श्याम” मन जनकवि कोदूराम “दलित” जी के कविता मन के शीर्षक ला अपन गीत म समो के काव्यांजलि प्रस्तुत करिन संगेसंग लक्ष्मण मस्तुरिया जी के गीत के डाँड़ मन ला रेखांकित अपन गीत म ढाल के आदरांजलि समर्पित करिन अउ अलग अलग भाव के गीत सुनाइन।
भिलाई ले पधारे युवा छन्दकार अउ गीतकार बलराम चंद्रकार
पढ़बो लिखबो मेहनत करबो तभे आरो पाबो रे
सुख के बिरवा आवव संगी घर घर मे जगाबो रे
सुनाके ताली बजाए बर मजबूर कर दिन फेर रामराज के सपना जगाए म सफल रहिन।
नदिया नरवा झील झरना के आरुग पानी पीतेन
रामराज के सपना ल संगी, सिरतोन म हम जीतेन।
बलौदाबाजार से पधारे छन्दकार दिलीप कुमार वर्मा जी चौपई छन्द आधारित अपन हिट गीत बइगा प्रस्तुत करके अंधविश्वास उन्मूलन बर सुग्घर संदेश दिन –
मोला तँय असने झन जान पकड़वँ मँय धर मरी मसान
रतिहा जाथंव मँय समसान, मोर भूत ले हे पहिचान
जनकवि दलित जी के सुपुत्र अरुण कुमार निगम अपने प्रसिद्ध गीत तपत कुरु के माध्यम ले छत्तीसगढ़ी भाषा के महत्ता बताइन –
तपत कुरु तपत कुरु, नइ भूलय मिट्ठू तपत कुरु
छत्तीसगढ़ी बड़ गुरतुर लागै, इंग्लिश लागै करु-करु
संगेसंग दलित जी के सुप्रसिद्ध गीत
छन्नर छन्नर पैरी बाजे, खन्नर खन्नर चूरी,
हाँसत कुलकत मटकत रेंगय, बेलबेलहिन टूरी
अउ मस्तुरिया जी की अमर रचना मँय छत्तीसगढ़ के माटी अँव के कुछ पद सुनाके अपन भावांजलि समर्पित करिन।
ये कवि सम्मेलन म दलित जी के बेटा-बहू श्रीमती सपना निगम, राधाकृष्ण पीहर धाम के मंच ले अपन मधुर कंठ म बृजधाम में कान्हा की होली के प्रसंग ला ताजा कर दिन –
रंग बगरे हे बिरिज धाम मा कान्हा खेलय होली
बृंदावन मा आय हवै गोपी ग्वाल के टोली
दुर्ग से पधारे छत्तीसगढ़ी गजलकार बलदाऊ राम साहू अपन हिन्दी गजल म गाँव ले नँदावत अपन परम्परा अउ संस्कृति की पीरा ला परगट करिन –
छाले तो दिखते नहीं अब किसी के पाँव में
अपने पराये हुए अब तो मेरे गाँव में…
दुरुग ले पधारे छन्दकार सूर्यकान्त गुप्ता अपन हिन्दी के दोहा छन्द म दलित जी ला भाव सुमन अर्पित करिन –
छत्तीसगढ़ी साहित्य में याद करें वह नाम
छन्दबद्ध कविता रचें, गुरुवर कोदूराम।
कविसम्मेलन के आखरी दौर म जनता के विशेष फरमाइश म गीतकार मीर अली मीर जी
मखना के चानी,अब्बड़ चुहकिन हे संगी
हुसियार बनव गा…..
मनकइना चिरइया उड़ा जाही का?
नँदा जाही कारे नँदा जाही का?
चनादार मा… अउ वन्दे मातरम् जइसन सरलागबमधुर गीत सुनाके जनता ला काव्य रसधारा में भिंजोय दिन।
अर्जुन्दा के गीतकार मिथिलेश शर्मा “निसार” अपन संचालन म दलित जी और मस्तुरिया जी के व्यक्तित्व और कृतित्व के बारे म बतावत मोर संग चलव रे, मोर धरती मइया जय होवै तोर जइसन गीत के झलकी अपन सुरीला कंठ ले करिन, झलकियाँ प्रस्तुत करिन तब लक्ष्मण मस्तुरिया जी खुद मंच म गावत हें, ये भोरहा होगे।
ये ऐतिहासिक काव्यांजलि केआयोजन ग्राम पंचायत के पंच, सरपंच, टिकरी के ग्रामवासी अउ संगवारी हमर गाँव के” वाट्सएप समूह के रसिक सदस्य मन करिन। कार्यक्रम के आखिर म सरपंच ग्राम पंचायत टिकरी श्री रीतेश देवांगन हर जम्मो झन के आभार परगट करिन।
निमगा साहित्यिक कविसम्मेलन म ये बात साबित होगे कि गीत कभू मर नइ सकय। सुग्घर साहित्य छोटे छोटे गाँवों म घलो सरधा अउ मया के संग सुने अउ सराहे जाथे।

लउछरहा..