सब के सब पारत हे गोहार, बोट डार-डार

दुर्ग (धमेन्‍द्र निर्मल के सार समाचार), ए पइत के लोकसभा चुनई म मतदान करे बर जगाए खातिर गजब उदिम करे जावत हे। इही बेरा दुरूग जिला म जिला प्रशासन कोति ले घलो कईठो आने-आने कार्यक्रम चलाए जात हे। जेमा बिरस्पत के मानस भवन म बड़ सुग्घर कार्यक्रम देखे बर मिलिस। उहां बढ़िया-बढ़िया कलाकृति के माध्यम ले मतदाता जागरूकता अभियान के सुंदर सुंदर संदेस दिए गए रिहिसे।




इही कड़ी म आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मन मतदान जागरूकता लाए खातिर कलश यात्रा निकालिन। कलेक्टर अंकित आनंद अउ अपर कलेक्टर संजय अग्रवाल हर एला हरियर झंडा दिखाइन। कलस यात्रा के अधिकतर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अउ सहायिका मन बीएलओ घलो हावयं। ये पइत वो मन जब बोटर पर्ची धरके घरो-घर जाहीं त संग म पींवराए चाउँर घलो होही। जेकर ले मतदान के संदेश घलो हो जाय। ये यात्रा कलेक्टर कार्यालय ले मानस भवन पहुंचिस। जिहां दुरूग संभाग के आयुक्त श्री दिलीप वासनीकर हँ जम्मो झिन ल मतदान के किरिया खवाइस। उन मन कहिन कि अपन-अपन ठऊर म आप मन के जनजुराव जबर होथे कहूँ आप मन, लोगन ल मतदान खातिर प्रेरित करिहौ त वो मन खचित आगू आहीं। कलेक्टर ह कहिस कि जम्मो झन ल कहिहौ कि ए पइत मतदान ठऊर म तिरपाल के बेवस्था रइही तेकर पाए के आप मन बेरा उतरे के रद्दा झन देखिहौ, कोनो टेम आके वोट डार के चले जाहौ।




इहां स्वीप अभियान के अंतर्गत रंगोली के प्रदर्शन करे गिस। जउन अतेक सुग्घर रिहिने कि कलेक्टर अंकित आनंद ह ओइसनेहेच रंगोली माडल पोलिंग स्टेशन म तको बनाए बर कहिस, एकर छोड स्वीप केक के घलो प्रदर्शन करे गिस। आयुक्त दिलीप वासनीकर ह स्वीप केक ल काटिस। एमा मतदाता जागरूकता के संदेश लिखाय रिहिस। एकर पीछू बहुत अकन खाये-पीये के समान तियार करे गए रहिस अऊ सबो में स्वीप अभियान के संदेश दिये गए रिहिस। ओइसनेहे स्वीप के लोगो रेडी-टू-ईट अऊ आने खई-खजानी अइसे बनाये गए रिहिस हे जेमा स्वीप अभियान के लोगो, दिव्यांग मतदाता मन के सुविधा आदि देखाए गए रिहिसे। आयुक्त श्री वासनीकर ह सबले ज्यादा तारीफ एक अइसन कलाकृति के करिन जेमा लिखाये रिहिस कि अजादी हमला महापुरुष मन अपन बलिदान अऊ परिश्रम ले देवाये रिहिन हे। अपन मताधिकार के परयोग कर हम एला अक्षुण्ण रखन। सुंदर कलाकृति मन बर सबला ईनाम देके सम्मानित घलो करिन।








चटकारा
भकानन्द – ए काय रोज भाजी-भात वो, तोला कहिथौ न बने कुकरा बोकरा रांधे कर कहिके ।
फेकन बाई – मै ह कहिथौं न त जरे कस लागथे , कब के काहत हौं फोरन बर घर मे एक ठन बांड़ी गोंदली नई हे , तेन ह सुरता हे धन नइ हे ।

लउछरहा..