जैविक खेती ले बारी के गोंदली बढ़ाही आमदनी, गरुवा के होही उद्दार

किसान मन बर बढ़िया खबर हे के अब किसान अपन कम रकबा म घलोक जैविक खेती करके अपन आमदनी ल बढ़ा सकत हे। गांव म करीबन सबो के घर म बारी होथे ओमा ओ मन साग-भाजी बोंथें। कई झन म साग-भाजी के खेती तको करथें तेला बारी कहिथें। ये बारी म आन साग भाजी मन संग किसान मन गोंदली तकों बोंथें। ये गोंदली ह भाजी खाए के काम आथे अउ जब फसल पाक जाथे त ओकर कांदा ल खन के बेंचे जाथे। पारंपरिक गोंदली के फसल म गोंदली के आकार छोटे होए के शिकायत जादा आथे अउ ओकर उत्‍पादन कम होथे।
आज बिहनिया इफको कोति ले बगराए गए जानकारी ले पता चले हे के रायपुर के इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय म पहली पईत गोमूत्र अऊ गोबर मिंझरा पानी ले गोंदली (प्याज) के जैविक फसल ल तैयार कर ले गए हे। कृषि वैज्ञानिक मन के बतौति ये परयोग काफी सफल रहे हे। ए पद्धति के सहारे उत्पादन तको बाढ़ही अउ फसल के गुणवत्ता घलोक अच्छा होही। गोंदली के आकार बढ़े होए ले एला बाजार म बेचे म कीमत घलोक सामान्य फसल ले जादा मिलहि।
भूपेश सरकार के ‘गरूवा नरवा बारी’ के नारा के मुताबिक ए तकनीक ह घरेच के ‘गरुवा’ आधारित हे जउन ‘बारी’ ले आमदनी बढ़ाही।

लउछरहा..