छेरी के चरे अउ राजा के धरे, न उल्हिस न उल्होवय

नरवा, गरूवा, घुरवा, बारी, छत्तीसगढ़ के हे चिन्हारी
जनता अपन समझ के नइ जुरही त, सरकार ल परही भारी

धर्मेन्‍द्र निर्मल के सार समाचार, नदिया मन के दुर्दशा उपर चिंता करत मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कहिन कि बीते बछर म उपेक्षापूर्ण नीति के चलत नदिया मन म मनमाड़े अतिक्रमण बाढ़े हे। नदिया मन के ए दुर्दशा ल कोनो भी उदीम करके थामेच् ल परही। भूपेश बघेल एहि बात ल लेके 31 मई तक जोरदरहा कार्ययोजना बनाए के निर्देश मुख्य सचिव ल दिए हें।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कहिन के राज्य के नदिया हमन के जिनगी देवइया, मान मरजाद, धरोहर अउ महतारी बरोबर हे। नदिया मन ल प्रदूषण मुक्त करके उनला पुनर्जीवित करे खातिर युद्धस्तर म प्रयास करे के जरूरत हे। उनमन कहिन के ए लक्ष्य ल पाए खातिर सरकारी प्रयास के संगे संग बड़का जनभागीदारी घलो जरूरी हे। नदिया मन के संवर्धन खातिर विभाग मन के संबंधित अधिकारी, जनप्रतिनिधि, स्थानीय समुदाय के बने-बने मनखे अउ अनुभवी नामी स्वयंसेवी
संगठन मन के सहायता ले जा सकत हे।
भूपेश बघेल ह मुख्य सचिव ल निर्देशित करत कहिन कि नदिया मन ल लेके बनइया कार्ययोजना म नदिया मन के पार ल पक्का करे के, नदिया मन के करार म घना पेड़ लगाए के, अतिक्रमण मन ल हटाए के अउ प्रदूषण करइया कारण मन ल दूरिहा करे जइसन बूता आवश्यक रूप म संघेरे जाए।

चटकारा:-
कोचरू:- पहिली घर पीछू मनखे मिलके नदिया म बंधानी बांध डारन, कुआं तरिया खन – कोड़ डारन, गली असन ल तको लीप बहार के चतवार डारन फेर जबले एकर जुम्मा सरकार ले हे तब ले ए सब बूता उल्टा के पुल्टा होए लगे हे, ओकर नांवे बुतागे हे रे बुदरू।
कोचरू:- बात अइसन हे कोचरू, छेरी के चरे अउ राजा के छुए – धरे कभू नइ उल्होवय कहिथे। उल्हो गे त ओकर करम किस्मत।

लउछरहा..