राष्ट्रीय पुरातत्व संगोष्ठी म 25 शोधपत्र पढ़े गीस

रायपुर, संचालनालय संस्कृति अउ पुरातत्व कोति ले आयोजित “मंदिर स्थापत्य अउ कला के विकास: 5 वीं ले 11 वीं सदी ईसवी” उपर केन्द्रित राष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसर दिन 29 जनवरी के महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय सभागार म 25 शोधपत्र पढ़े गीस। ये दिन चार अकादमिक सत्र पूरा होइस। ए आयोजन म कई ठन राज्य मन ले आए अध्येता, पुरातत्वविद मन ह भारत के कई ठन क्षेत्र के जुन्‍ना मंदिर अऊ शिल्पकला के विशेषता मन ल उद्घाटित करिन। डॉ राजेंद्र यादव भोपाल ह कुंडनपुर (मध्यप्रदेश) के नव अन्वेषित शैव मंदिर अउ मठ मन के स्थापत्य अउ महत्व उपर प्रकाश डालिन। डॉ आनंद मूर्ति मिश्र जगदलपुर ह बस्तर के आदिवासी संस्कृति ले संबंधित स्मृति स्तंभ मन के महत्व बताइन।

श्री राहुल सिंह रायपुर ह छत्तीसगढ़ के ईंटा अऊ पत्थर ले बने मंदिर मन के विशेषता मन ल रेखांकित करत प्राचीन स्थापत्य के अध्ययन बर उपयुक्त शोध प्रविधि ल अपनाए जाय के जरूरत बताईन। बनारस ले आए डॉ सुनीता यादव ह मुकुट के विशेषता, महत्व अऊ ओखर विकास ल बताइन।
एखर अवसर म डॉ एल एस निगम, डॉ रमेंद्र नाथ मिश्र, डॉ आर एन विश्वकर्मा, डॉ मंगलानंद झा, डॉ शंभूनाथ यादव, डॉ आशुतोष चौरे संग विश्वविद्यालूय अऊ महाविद्यालय के शोध छात्र अउ इतिहास अउ पुरातत्त्व प्रेमी मौजूद रहिन।

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