लौह, काष्ठ, माटी शिल्प मन म हे लोक जीवन के रंग : शिल्पग्राम ल मिलत हे विदेशी मेहमान मन के सराहना

रायपुर, आदिवासी मन के कला स्वाभाविक अऊ जीवंत होथे, इंकर कला मन म लोक जीवन के घटना के चित्रण मिलथे। कलाकार मन के सरल अऊ सहज अभिव्यक्ति चारचांद लगा देथे। चाहे मिट्टी-शिल्प के बात होवय या लौह-शिल्प के, कलाकार मन के सिद्धहस्त हाथ, उंखर जादूगरी देखतेच बनथे। राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव के अवसर म साईंस कॉलेज मैदान म बनाय गए शिल्पग्राम म भारी भीड़ उमड़त हे। इहां हैण्डलूम, बांस-शिल्प, डोकरा-आर्ट, बस्तर-आर्ट अऊ माटी शिल्प मन ल देश-विदेश ले आए कलाकार मन अऊ स्थानीय मनखे मन कोति ले खूब सराहे जात हे।

छत्तीसगढ़ के माटीशिल्पी श्री अशोक चक्रधारी कोति ले चाक ले तियार करे जात मिट्टी गमला संग कई ठन बर्तन मन के निर्माण अऊ कोसा ले धागा बनाए के प्रक्रिया देखे जा सकत हे। माटीशिल्प के तहत मिट्टी ले बने हाथी, घोड़ा, गमला, दीया संग घरेलू उपयोग के कई प्रकार के बर्तन बिक्री-सह-प्रदर्शनी बर रखे गए हे। इहां कोण्डागांव के बांस शिल्‍पी मन कोति ले तियार करे गए पेन स्टैण्ड, बासुंरी, मछली, फर्नीचर, हैण्डलूम प्रदर्शनी म कुरूद, रायगढ़, बिलासपुर, छुईखदान, सोमाझटिया, चांपा ले आए कारीगर मन कोति ले कोसा के उत्कृष्ट उत्पाद मन के प्रदर्शनी लगाए गए हे।

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