नारायणपुर, जिला के अबूझमाड़ क्षेत्र के ग्राम कच्चापाल म अब सुशासन अऊ आत्मनिर्भरता के नवा अंजोर बगर गए हे। कभू नक्सल हिंसा अऊ डरे-डर म जीयइया ए गाँव म शासन के ‘नियद नेल्ला नार’ योजना ह विकास के रद्दा खोले हे। सड़क, बिजली अऊ पेयजल जइसे सुविधा मन ले वंचित ये क्षेत्र आज आत्मनिर्भरता के चिन्हारी बन गए हे।
राज्योत्सव म कच्चापाल के आश्रित बस्ती ईरकभट्टी के महिला मांगती गोटा अऊ रेनी पोटाई अपन गाँव म उपजाए जैविक बासमती चाउंर लेके राजधानी पहुँचे हें। ये महिला मन राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के लालकुंवर स्व-सहायता समूह ले जुड़े हें। पहिली दलाल मन उंखर ले 15–20 रूपिया किलो म चावल बिसा लेत रहिन, फेर अब प्रशिक्षण अऊ बाजार तक सीधा पहुँच मिले ले इही जैविक बासमती 120 रूपिया किलो म बिकत हे।
एरिया कोऑर्डिनेटर सोधरा धुर्वे बतात हे के सशस्त्र बल के तैनाती अऊ शासन के सक्रिय योजना ले अब गांव वाले मन म आत्मविश्वास बाढ़े हे। महिला मन न सिरिफ खेती करत हें बल्कि बाँस के टुकनी अऊ बहिरी जइसे उत्पाद घलोक तैयार करत हें। ए साल समूह ह 40 कुंटल जैविक बासमती के उत्पादन करे हे।
कच्चापाल के ये कहानी भय ले विश्वास अऊ गरीबी ले समृद्धि के यात्रा के चिन्हारी बन गए हे। अबूझमाड़ के महिला मन नवा छत्तीसगढ़ के ओ नवा बिहान के मिसाल हे, जेमां आत्मनिर्भरता ही सच्चा विकास बन गे हे।
अबूझमाड़ म बगरिस सुशासन के अंजोर : कच्चापाल के महिला मन ह जैविक खेती ले बदलिन तकदीर

