मनरेगा के डबरी बनिस समृद्धि के आधार, भाजी-पाला के पैदावार ले बाढ़िस अम्बिका कंवर के कमई

जल सरंक्षण ले मिलिस बछरभर सिंचाई के सुबिधा, आत्मनिर्भरता के कोती बढ़िस परिवार

जांजगीर-चांपा, जिला के गांव खपरीडीह के श्रीमती अम्बिका कंवर हा मनरेगा के माध्यम ले बने डबरी के उपयोग करके अपन जिन्दगी म सुग्घर बदलाव के नवा कहानी लिखे हे। जल संरक्षण के ये ढांचा हा सिरिफ ओखर खेती ला नवा दिसा नइ देहे हे, भलुक परिवार के कमई ला बढ़ाय अऊ आत्मनिर्भर बनाये बर एक मजबूत आधार घलो तियार करे हे।
कइ बछर पहिली तक ओखर परिवार हा सिरिफ बरखा के पानी उपर अधारित खेती करत रहिस। सिंचाई के साधन नई होय के सेती खेती-किसानी हा छोटे जघा म सिमट जावत रहिस अऊ फसल के पैदावार घलो सोच मुताबिक नई मिल पावत रहिस। किसान मनके अइसनहे तकलीफ मनला ध्यान म रखत बछर 2024-25 म महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत ओखर खेत म लगभग 2.39 लाख रुपिया के खरचा ले डबरी के निर्माण कराए गीस।
डबरी बने ले खेत म बरखा के पानी ला रोकना असान होईस अऊ सिंचाई बर बछरभर पानी मिले लगिस। ये बूता ले 836 मानव दिवस के रोजगार घलो बनिस, जेकर ले इहाँ के गांव वाले मनला घलो काम मिलिस। पानी के सुबिधा बाढ़े के बाद अम्बिका कंवर हा पुराना फसल मनके संगे-संग भाजी-पाला के पैदावार सुरू करिस। अभी ओ ह पताल, भांटा, रमकेरिया, पत्तागोभी, तूमा, मिर्चा, बरबट्टी, करेला अऊ खीरा जइसे किसम-किसम के भाजी-पाला के खेती करत हे। बिसेस रूप ले तूमा अऊ ढोंड़का के फसल ले ओ ला बड़ सुग्घर कमई होवत हे।
श्रीमती अम्बिका कंवर हा बताथें के डबरी के निर्माण ओखर परिवार बर एक बड़का उपलब्धि साबित होईस हे। अब ओ बछरभर खेती कर पावत हे, जेकर से परिवार के आर्थिक स्थिति म बड़ सुधार आए हे। अवइया दिन म ओ ह डबरी म मछरी पालन सुरू करके कमाई के एक अउ नवा रस्ता बनाये के योजना घलो बनावत हे।
गांव खपरीडीह के ये सफलता के कहानी हा देखाथे के मनरेगा के तहत बने जल संरक्षण के ढांचा मन सिरिफ खेती ला न ही, भलुक गांव-घर के परिवार मनके जिन्दगी के स्तर अऊ आजीविका ला घलो मजबूत बनावत हें। अम्बिका कंवर के डबरी आज सरलग खेती, जल संरक्षण अऊ गांव-घर के आत्मनिर्भरता के एक प्रेरणा देवइया मिसाल बन गे हे।

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