विष्णु भोग चाउर के राखी बनही छत्तीसगढ़ के नवा पहचान

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, ए बछर राखी के तिहार छत्तीसगढ़ के समृद्ध सांस्कृतिक विरासत अउ अपन भुंइया के सामान मन के खास पहचान ला एक नवा ऊँचाई देहे जात हे। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला के नामी विष्णु भोग धान अउ ओकर महमहई चांउर ले बनाए जात सुघ्घर अउ कलात्मक राखी मन ए पइत बाजार म विशेष आकर्षण के केंद्र होहीं। भाई-बहिनी के पवित्तर नता के चिन्‍हारी बनइया ए राखी मन सिरिफ मया के बंधन नोहे, बल्कि आत्‍मनिर्भरता, महिला सशक्तिकरण अउ स्थानीय सामान मन ला बढ़ावा देहे के संकल्प के घलो संदेश देही।
राज्य शासन के ग्रामीण आजीविका संवर्धन योजना मन के तहत बिहान ले जुड़े महिला स्व-सहायता समूह के महिला मन ह स्थानीय संसाधन अउ पारंपरिक हस्तकला के सुघ्घर तालमेल बइठावत विष्णु भोग चाउर ले आकर्षक राखी तियार करे हवंय। रंग-बिरंगा धागा, पारंपरिक सजावट अउ गमकइया विष्णु भोग चांउर के संग ले बने ए राखी मन छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक पहचान अउ स्थानीय खेती सामान के खास पहचान ला देसभर म पहुँचाए के जरिया बनही।
ए नवा काम ला सफल बनाए बर जिला प्रशासन कोती ले महिला स्व-सहायता समूह मन ला खास प्रशिक्षण देहे गए हे। प्रशिक्षण म ओमन ला राखी बनाए के आधुनिक अउ सुघ्घर तरीका मन के संगे-संग बेचे अउ गुणवत्ता के बात मन के जानकारी घलो देहे गीस। सिखाई के बाद महिला मन आत्‍मविश्‍वास के संग खुद राखी बनावत हवंय, जेकर से उंकर कमई बाढ़त हे अउ आतमनिर्भरता घलो मजबूत होवत हे।
राखी तिहार के मौका म बनाए गय ए खास राखी मन ला बेचे बर रेलवे स्टेशन, कलेक्ट्रेट परिसर अउ अलग-अलग ग्राम संगठन परिसर म खास दुकान (विक्रय केंद्र) लगाए जात हे। ए दुकान मन के जरिया ले गाहक मन ला सीधा महिला समूह ले राखी बिसाए के मौका मिलही, जेकर से बिचौलिया मन के काम खतम होही अउ महिला मन ला उंकर सामान के सही दाम मिलही।
महिला स्व-सहायता समूह मन के कहना हे कि विष्णु भोग चाउर ले राखी बनाना उंकर बर सिरिफ कमई के जरिया नोहे, बल्कि उंकर हुनर, आत्‍मबिस्वास अउ सामाजिक पहचान ला घलो नवा दिशा देवत हे। स्थानीय संसाधन मन ऊपर आधारित अइसन नवा काम गांव के महिला मन बर रोजगार के पक्का रस्ता खोलत हे अउ ओमन ला आर्थिक रूप ले अऊ मजबूत बनावत हे।
स्थानीय खेती सामान अउ पारंपरिक हाथ के कला ला अइसन नवा प्रयास मन के जरिया ले कहूं बाजार मिलत रहिही, त एकर ले गांव के अर्थव्यवस्था ला नवा ताकत मिलही। संग म गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला के नामी विष्णु भोग चाउर ह प्रदेश अउ देसभर म नवा पहचान बनाही। एहा स्थानीय सामान मन के सही कीमत अउ मान बढ़ाए के बढ़िया मिसाल बनत हे।
ए राखी म विष्णु भोग चाउर ले तियार ए अनूठा राखी मन भाई-बहिनी के अटूट मया के संग-संग ‘वोकल फॉर लोकल’, महिला सशक्तिकरण, आत्‍मनिर्भर भारत अउ स्थानीय सामान मन के सुरक्षा के प्रेरणादायी संदेश घलो देही। एहा देखाथे के पारंपरिक खेती सामान अउ स्थानीय कला के मिलाप न सिरिफ सांस्कृतिक विरासत ला संजोके रख सकत हे, बल्कि देहाती परिवार मन के रोजी-रोटी अउ आर्थिक बढ़त के पक्का आधार घलो बन सकत हे।

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