बीजापुर, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के अंतर्गत चलइया कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), बीजापुर कोती ले प्राकृतिक खेती ला बढ़ावा देहे खातिर करे जात सरलग उदीम ले जिला के किसान अब खातू अउ जैविक किसानी सामान मन के मामला म आत्मनिर्भर बनत हवंय। मार्च 2026 ले जुलाई 2026 के बीच म बीजापुर विकासखंड के अलग-अलग गाँव मन म रखे गय चार प्रशिक्षण कार्यक्रम मन के सकारात्मक असर अब बड़का पैमाना म दिखे लगे हे।
ए सिखाई कार्यक्रम मन म किसान मन ला जीवामृत, घनजीवामृत, बीजामृत, प्राकृतिक कीटनाशक, मल्चिंग अउ माटी के स्वास्थ्य सुरक्षा जइसे प्राकृतिक खेती के तरीका मन के व्यावहारिक जानबारी देहे गीस। सीखे के बाद गाँव मुसालूर, इटपाल, नुकनपाल, मांझीगुड़ा, तुमनार समेत आसपास के क्षेत्र मन के किसान मन ह खुदे जैविक किसानी सामान मन ला बनाना शुरू कर दीन।
किसान मन ह स्थानीय स्तर म उपलब्ध गोबर, गौमूत्र, गुड़, बेसन अउ आन जैविक सामान मन के उपयोग करके कम खरचा म जीवामृत अउ घनजीवामृत तियार करिन अउ ओकर नियम से उपयोग अपन फसल मन म शुरू करिन। एकर ले रासायनिक खातू अउ कीटनाशक मन ऊपर होवइया खरचा कम होगे हे, उहें माटी के उपजाऊपन म सुधार, फसल मन के बढ़िया बढ़त अउ पर्यावरण बर हितकारी खेती के प्रति किसान मन के बिस्वास घलो मजबूत होए हे।
सिखाई पाए किसान मन ह अपन अनुभव आन किसान मन के संग साझा करिन, जेकर नतीजा ए होइस कि प्राकृतिक खेती के ए अभियान हा तेजी ले आसपास के गाँव मन तक बगर गए। अभी के समय म ए चार सिखाई कार्यक्रम मन के प्रत्यक्ष अउ अप्रत्यक्ष असर ले 500 ले जादा किसान मन प्राकृतिक खेती के तरीका मन ला अपनाके फायदा उठावत हवंय। किसान मन खुद जैविक सामान मन ला बनाके पैदावार के लागत ला घटाए के संगे-संग टिकाऊ अउ सुरक्षित खेती प्रणाली कोती घलो आगू बढ़त हवंय।
कृषि विज्ञान केंद्र, बीजापुर कोति ले किसान मन ला समय-समय म तकनीकी मार्गदर्शन, खेत के दौरा अउ लगातार सहयोग घलो देहे जात हे, जेकर से जिला म प्राकृतिक खेती के दायरा सरलग बाढ़त हे। ए पहल बीजापुर म टिकाऊ खेती, प्राकृतिक संसाधन मन के सुरक्षा अउ किसान मन के कमई बढ़ाए के दिशा म एक प्रेरणादायी मिसाल बनके आगु आवत हे।
प्राकृतिक खेती कोती बढ़त बीजापुर: खातू बर आत्मनिर्भर बनिन किसान, 500 ले जादा किसान मन ला मिलत हे लाभ

