अजोला ले सँवरिस आजीविका : धमतरी के बिहान दीदी मन ह प्राकृतिक खेती अऊ आत्मनिर्भरता के रचिस नवा इतिहास

अमाली पंचायत के महिला मन सोझ रखिन प्रेरक मिसाल

धमतरी, तरिया अऊ सोता मन के पानी म ऊलइया हरियर अजोला (Azolla) ल मनखे मन एक साधारण पानी के घास समझ के अनदेखा कर देथें। फेर छत्तीसगढ़ के धमतरी ज़िला के नगरी विकासखंड के ग्राम पंचायत अमाली के आदिवासी बिहान स्व-सहायता समूह के महिला मन ह इही अजोला ल अपन आजीविका, आर्थिक स्वावलंबन अऊ प्राकृतिक खेती के मुख्य आधार बना दे हवँय। वैज्ञानिक सोच, सही सिखौना अऊ अटूट सामूहिक प्रयास के बल म ए महिला मन कोति ले सुरू करे गे ए पहल आज पूरा राज्‍य बर एक अनुकरणीय अऊ प्रेरणादायक मॉडल बनके उभरे हे।

सिखौना ले मिलिस नवाचार के रद्दा
अमाली पंचायत के कृषि सखी अऊ ‘बिहान’ समूह के सक्रिय सदस्य श्रीमती अनिता बाई मरकाम ह बताथे के सुरु म ओ ल अजोला के व्यावसायिक अऊ खेती-किसानी म उपयोग के जानकारी नई रहिस। पशुपालन विभाग कोती ले रखे गे सिखौना कार्यक्रम ले जुड़े के बाद ओमन ल अजोला के कल्चर मिलिस।
सही मार्गदर्शन अऊ वैज्ञानिक तरीका ल अपनावत वो ह अपन घर के छोट-छोट टैंक मन म अजोला उगाना सुरू करिस। बराबर देख-रेख अऊ सफ़ाई के बल म ओ अब तक 25 किलोग्राम ले ज़्यादा अजोला के सफल पैदावार कर चुके हवय अऊ अब बड़े पैमाना म एकर विस्तार करे कोती आगू बढ़त हवय।

खेती म वरदान: रासायनिक खाद के बेहतर विकल्प
समूह कोति ले उगाए गए अजोला के मुख्य उपयोग धान के फ़सल म जैविक पूरक के रूप म करे जात हे। कृषि विशेषज्ञ मन के मुताबिक, अजोला के प्रयोग ले भुइयाँ के उपजाऊ छमता म बढ़त होत हे। खेत म नाइट्रोजन के मात्रा प्राकृतिक रूप ले बढ़त हे। ए माटी म नमी बनाए रखे बर मददगार हे। रासायनिक खाद अऊ उरवरक मन म किसान मन के भरोसा बहुत कम होए हे, जेखर ले खेती के खरचा घटत हे।

पशुपालन अऊ कुक्कुट पालन बर सुपरफ़ूड
अजोला के उपयोग सिरिफ फ़सल मन तक सीमित नई हे। ए गाँव-देहात के लोगन बर कम खरचा वाला पोसक आहार साबित होत हे। दुधारू मवेसी मन के दूध के पैदावार अऊ गुणवत्ता म सुधार होत हे। मछरी पालन बर मछरी मन के झटकुन बाढ़ म सहायक हे। अइसनहे कुकरी मन के बेहतर सेहत अऊ वजन बढ़ाए बर अनुकूल हे।

सामूहिक प्रयास अऊ महिला सशक्तिकरण
श्रीमती अनिता बाई मरकाम के कहना हे के जे अजोला पहिली सिरिफ एक नवा जानकारी रहिस, ओ आज हमर परिवार, समूह के बहिनी मन अऊ क्षेत्र के किसान मन बर समृद्धि के आधार बन चुके हे। स्थानीय सहयोगी चेतन कुमार नेताम अऊ तुषार यादव के सरलग सहयोग ले बिहान समूह के दीदी मन म प्राकृतिक खेती ल लेके एक नवा आत्‍मविश्‍वास जागे हे। आघू चलके ए समूह अजोला के संगे-संग वर्मी कम्पोस्ट, जैविक खाद अऊ दूसर मूल्यवर्धित सामान तैयार करे के योजना बनावत हे।

अमाली के आदिवासी महिला मन के ए नवाचार ह साबित करथे के कहूं स्थानीय संसाधन मन के उपयोग वैज्ञानिक सोच ले करे जाए, त ग्रामीण अर्थव्यवस्था ल पूरा बदले जा सकत हे। पर्यावरण के रच्छा, महिला मन के आर्थिक भागीदारी, किसान मन के खरचा म कमी अऊ आत्मनिर्भरता जइसे कतको उद्देश्य मन ल पूरा करत ए पहल ‘सशक्त महिला, समृद्ध गाँव’ के सही संदेसा देवत हे।

लउछरहा..