समन्वित खेती अपनाके नारायणपुर के तिजाराम ह रचीस सफलता के नवा कहानी

परंपरागत खेती छोड़ अपनाइस बहुआयामी तकनीक, अब सालाना कमावत हे 2 लाख रूपिया ले जादा

नारायणपुर, छत्तीसगढ़ के वनांचल जिला नारायणपुर के गांव बड़ेझमरी म एक किसान के पक्का संकलप अउ आधुनिक सोंच ह विकास के नवा रद्दा गढ़े हे। कइ बछर ले परंपरागत खेती करत किसान तिजाराम पिता सुखराम ह खेती के परंपरागत ढर्रा ल बदलके ‘समन्वित खेती’ (Integrated Farming) ल अपनाइस अउ आज वो ह इलाका के सैकड़ों किसान मन बर प्रेरणापुंज बन गे हे।

20 बछर के अनुभव अउ नवाचार के सोंच
तिजाराम बीते दू दसक ले किसानी के काम म लगे हे। ओकर तीर लगभग 2 हेक्टेयर खेती के भुइयां हे, जेमा वो ह धान, मक्का, उड़द, चना अउ राहेर जइसे परंपरागत फसल लेवत रहिस। फेर सिरिफ एके फसल ऊपर आसरित रहे के जगा ओ ह उद्यानिकी फसल, मवेसी पालन, कुकुरा पालन, बत्तख पालन अउ मछरी पालन ल अपन खेती के हिस्सा बनाइस। ये बहुआयामी सोंच ले ओ ल अब साल के बारों महीना सरलग आमदनी होवत हे।

‘आत्मा’ योजना ह देखाईस नवा रद्दा
तिजाराम के सफलता के असली जात्रा लगभग तीन बछर पहिली सुरू होईस, जब ओ ह कृषि विभाग के अधिकारी मन अउ ‘आत्मा’ योजना के मैदानी अमला के संपर्क म आइस। विभागीय प्रशिक्षण अउ मार्गदर्शन ले प्रेरित होके ओ आधुनिक तकनीक मन ल अपन जमीन म उतारिस। विभाग कोती ले ओ ल राहेर उत्पादन बर उन्नत किसम के फोकट म बीजह अउ तकनीकी मार्गदर्शन मिले रहिस। ओ राहेर के खेती के संगे-संग कुकुरा पालन, बत्तख पालन अउ डबरी म मछरी पालन ल एक-दूसर ले जोड़के एकीकृत रूप दीस।

समन्वित खेती ले सालाना आमदनी 2 लाख पार, परिवार म आईस खुशहाली
अपन सफलता के गोठ-बात बांटत तिजाराम बताथे के जब खेती के संग मवेसी पालन, कुकुरा-बत्तख अउ मछरी पालन जइसे काम मन ल एक-दूसर ले जोड़ेंव, त खेत के हर कोना आमदनी देहे लगिस। समन्वित खेती के भरोसा आज मोर बछर भर के आमदनी 2 लाख रूपिया ले जादा होगे हे। अब परिवार के लालन-पालन न सिरिफ बने ढंग ले होत हे, बल्कि खेती के विस्तार करे के हौसला घलो बाढ़े हे।

गांव अउ इलाका बर बनिस ‘रोल मॉडल’
तिजाराम के ये सफलता सिरिफ ओकर घर तक सीमित नइ हे। ओकर ये उपलब्धि अउ बढ़त आमदनी ल देखके गांव बड़ेझमरी अउ आसपास के गांव मन के दूसर किसान घलो भारी प्रभावित हें। इलाका के किसान अब ओकर ले सीख लेके समन्वित खेती अउ सहायक किसानी काम मन ल अपनाए बर आगू आवत हे।

लउछरहा..