हांका – Chhattisgarhi News

स्वच्छता अऊ आत्मनिर्भरता के रद्दा देखावत हें कुसमी के महिला मन

Balrampur district is the beginning of social change

बलरामपुर, छोटे कस्बा मन ले अक्सर बड़े सामाजिक बदलाव के शुरुआत होथे। बलरामपुर जिला के नगर पंचायत कुसमी आज इही बदलाव के उदाहरण बन गए हे, जेमां महिला मन सरई (साल) के हरिय पाना ले दोना-पत्तल बनाके आत्मनिर्भरता कोति आगू बढ़त हें, संगेच प्लास्टिक मुक्‍त समाज के दिशा म घलोक सराहनीय कदम उठावत हें। ये पहल ए बात के प्रमाण हे के संकल्प अऊ सामूहिक प्रयास ले सीमित संसाधन मन के बीच घलोक बड़का बदलाव संभव हे।
पाछू समय म धार्मिक आयोजन अऊ भंडारा मन म प्लास्टिक ले बने दोना-पत्तल मन के उपयोग आम रहिस। तिहार के समय बड़ मात्रा म प्लास्टिक कचरा होवय, जेखर से पर्यावरण अऊ स्वच्छता दुनों प्रभावित होवय। फेर ए साल कुसमी म आयोजित पूजा-उत्सव मन म महिला समूह कोति ले तियार सरई पाना के दोना-पत्तल के उपयोग करे गीस। श्रद्धालु मन अऊ आयोजक मन ह एला पर्यावरण के अनुकूल के संग धार्मिक दृष्टि ले घलोक शुद्ध अऊ पवित्र मानिन। नगर के धार्मिक आयोजन मन म अब प्लास्टिक पूरा दर-किनार कर दे गए हे।
कुसमी के चंचल, रोशनी अऊ चांदनी महिला स्‍व सहायता समूह के 25 महिला मन ह बिना कोनो बड़े पूंजी निवेश के सरई पत्ता ले दोना-पत्तल बनाए के काम चालू करे हें। बाजार अऊ धार्मिक आयोजन मन म ए उत्पाद मन के मांग तेजी ले बढ़त हे। महिला मन प्रतिदिन 200 ले 300 रूपिया तक के आमदनी अर्जित करत हें। एखर से परिवार के आर्थिक स्थिति मजबूत होवत हे अऊ महिला मन घर के चारदीवारी ले निकलके समाज म अपन अलग पहिचान बनावत हें।
महिला मन ल नगर प्रशासन के घलोक पूरा सहयोग प्राप्त हे। नगर पंचायत कुसमी के मुख्य नगरपालिका अधिकारी श्री अरविंद विश्वकर्मा ह ओ मन ल “वूमन ट्री” योजना के अंतर्गत पौधारोपण काम के संगे-संग दोना-पत्तल निर्माण के गतिविधि मनल घलोक आगू बढ़ाए खातिर प्रेरित करे हें। उहें, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) श्री करूण डहरिया ह नगर के शांति समिति के बैठक म विशेष अपील करे हें के सबो तिहार अऊ आयोजन मन म केवल महिला समूह मन कोति ले तियार करे दोना-पत्तल के ही उपयोग करे जाए। ये पहल केवल आर्थिक आजीविका तक सीमित नइ हे, बल्कि सामाजिक जागरूकता अऊ पर्यावरण संरक्षण के दृष्टि ले घलोक महत्वपूर्ण हे। महिला मन खुद ल आत्मनिर्भर बनावत हे, नगर ल स्वच्छ अऊ प्लास्टिक मुक्‍त बनावत हे अऊ अवइया पीढ़ी बर स्वस्थ वातावरण के निर्माण करत हें।

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