जगदलपुर, सुकवार के दिन बस्तर के इतिहास म एक अइसन अध्याय के रूप म दर्ज हो गे जेला कभू भुलाय नहीं जा सकय, जब संभाग स्तरीय ‘बस्तर पण्डुम’ के शुभारंभ के मौका म देश के राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ह बस्तर के आदिम संस्कृति के सजीव अउ जीवंत रूप ला अपन आँखी ले देखिन। ये गरिमामयी अवसर म बास्तानार इलाका के आदिवासी युवा मन कोति ले प्रस्तुत विश्व-प्रसिद्ध ‘गौर नृत्य’ ह पूरा परिसर ला ढोल के थाप अउ घुँघरू के झनकार ले गुंजा दिस। राष्ट्रपति ह ये मनमोहक प्रस्तुति ला बड़ मगन हो के देखिन अउ बस्तर के समृद्ध सांस्कृतिक विरासत ला नजिक ले महसूस करिन।
बास्तानार के युवा मन कोति ले करे गय ये नाच ह केवल एक सांस्कृतिक प्रदर्शन भर नइ रिहिस, बल्कि ‘दंडामी माड़िया’ (बाइसन हॉर्न माड़िया) जनजाति के परंपरा, जीवन-दर्शन अउ सांस्कृतिक चेतना के एक जीवंत दस्तावेज रिहिस। जइसेच नर्तक दल ह मंच म उतरिस, ओमन के खास वेशभूषा ह उहाँ मौजूद सबो मनखे मन के धियान ला अपन कोती खींच लिस। पुरुष नर्तक मन के मुड़ म सजे गौर के सींग वाला मुकुट, जेला कउड़ी अउ मोर पंख ले सजाय गे रिहिस, ओ ह बस्तर के वन्य संस्कृति अउ गौर पशु के प्रति आदिवासी समाज के गहरा सम्मान अउ श्रद्धा ला देखावत रिहिस। उहें पारंपरिक साड़ी अउ गहना मन ले सजे महिला नर्तक मन जब अपन हाथ म धरे ‘तिरूडुडी’ (लोहा के छड़ी) ला भुइँया म पटकत ताल दिन, त एक अद्भुत अउ लयबद्ध आवाज ह पूरा माहौल ला मंत्रमुग्ध कर दिस।
नाच के बखत पुरुष नर्तक मन ह गला म टंगाए भारी ‘मांदरी’ (ढोल) ला बजावत जंगली भैंसा के आक्रामक, चंचल अउ ऊर्जा ले भरे चाल के नकल करिन। ये दृश्य ला देख के अइसन लागत रिहिस मानों देखइया मन ह जंगल के सजीव अउ प्राकृतिक माहौल के गवाह बन गे होय। उल्लास अउ आनंद ले भरे ये नाच म माड़िया जनजाति के शिकार-परंपरा, साहस अउ गजब के ऊर्जा साफ दिखत रिहिस। गोल घेरा म थिरकत युवक अउ ओमन के कदम ले कदम मिलावत युवती मन ह ये साबित कर दिन के आज के जुग म घलो बस्तर ह अपन सांस्कृतिक जड़ ला बड़े निष्ठा अउ गरब के साथ सँजो के रखे हवंय।
राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के गरिमामयी उपस्थिति म बास्तानार के कलाकार मन के ये सशक्त अउ भावपूर्ण प्रस्तुति ह न केवल बस्तर पण्डुम के सफलता के प्रतीक बनीस, बल्कि इसने बस्तर के लोक-कला, जनजातीय परंपरा अउ सांस्कृतिक वैभव ला देश के स्तर म एक बार फिर मजबूती ले स्थापित कर दिस।
राष्ट्रपति के आगू बास्तानार के युवा मन ह ‘गौर नृत्य’ ले बगराइन अद्भुत लोक-रंग

