मछेर पालन ले खुल गे किसान मन होवत हें मालामाल

कोरबा, छत्तीसगढ़ सरकार के ‘राज्य पोषित परागण योजना’ के तहत कोरबा जिला म मछेर पालन (मधुमक्खी पालन) ला जोर-शोर ले बढ़ावा देहे जावत हे, जेकर ले किसान मन के जिनगी म बने अउ टिकाऊ बदलाव देखे बर मिलत हवय। खास करके पोंड़ी-उपरोड़ा विकासखंड के कुटेश्वर, नगोई, बझेरा, सिंघिया अउ जुराली गाँव के किसान मन ह ये योजना के मदद ले पारंपरिक खेती के संगे-संग कमई के नवा रस्ता बना ले हवंय।
पहिली ये किसान मन ह सिरिफ़ धान के खेती करत रहिन, जेकर ले ओमन के कमाई कम रहिस। फेर अब मछेर पालन ह कम खरचा म जादा मुनाफा देके उमन ला आर्थिक रूप ले मजबूत बना दे हवय। ये योजना के माध्यम ले किसान अउ युवा मन ला स्वरोजगार ले जोड़ के आत्मनिर्भर बनाय के ठोस काम करे जात हे।
किसान मन ह उद्यानिकी विभाग के अधिकारी मन ले सलाह लेके कृषि उद्यान केंद्र कटघोरा अउ सरकारी उद्यान रोपणी म मछेर पालन के ट्रेनिंग लेहे हें। ट्रेनिंग के बाद किसान मन ह तकनीकी जानकारी के संग उत्पादन सुरू करिन। एक मछेर पेटी ले साल भर म लगभग 15 ले 25 किलो मंदरस (शहद) निकलथे, उहें 20 पेटी ले 1 ले 2 लाख रुपिया तक के सालाना कमाई हो सकत हवय।
मछेर ले फसल म परागण बाढ़े ले साग-भाजी, दाल, तिलहन अउ फल वाले फसल के पैदावार घलो 15 ले 30 प्रतिशत तक बाढ़ जाथे। शहद के अलावा मोम, पराग, रॉयल जेली अउ मउंहामक्खी के बिष (Bee Venom) के दवाई, कॉस्मेटिक अउ आयुर्वेदिक उद्योग म अब्बड़ मांग हवय, जेकर ले किसान मन बर कमाई के नवा दुआरी खुल गे हवय। योजना के तहत हर हितग्राही ला 45 मछेर कॉलोनी अउ 45 पेटी देहे गे हवय। एक छत्ता के लागत 2000 रुपिया तय हवय, जेमं 50 प्रतिशत यानी जादा ले जादा 1000 रुपिया के सरकारी मदद (अनुदान) देहे जात हे। कम जमीन म घलो चलइया ये योजना ह किसान मन बर फयदा वाला साबित होवत हवय अउ गाँव के अर्थव्यवस्था ला मजबूत बनावत हवय।

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