भारत के मुख्य न्यायाधीश ह छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी के विरासत ला देखावत ई-स्मारिका “नर्चरिंग द फ्यूचर ऑफ द ज्यूडिशियरी” के डिजिटल विमोचन करिन

रायपुर, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय कोति ले आज रायपुर के होटल बेबीलोन कैपिटल में भारत के माननीय मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री सूर्यकांत के सम्मान में एक गरिमामय अभिनंदन समारोह के आयोजन करे गीस।
ए समारोह म भारत के सर्वोच्च न्यायालय के माननीय न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री पी. एस. नरसिम्हा अउ माननीय न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री प्रशांत कुमार मिश्रा ह विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहिन। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के माननीय मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री रमेश सिन्हा ह विशेष अतिथि के रूप में सामिल होइन। ए मउका म छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के जम्मो माननीय न्यायाधीश मन घलो उपस्थित रहिन।
कार्यक्रम के सुरूआत गणमान्य अतिथि मन के औपचारिक स्वागत अउ अभिनंदन के संग होइस। एकर बाद, भारत के माननीय मुख्य न्यायाधीश ह छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी के ई-स्मारिका 2026 के डिजिटल विमोचन करिन, जेकर शीर्षक “नर्चरिंग द फ्यूचर ऑफ द ज्यूडिशियरी” (Nurturing the Future of the Judiciary) आय।
अपन स्वागत भासन में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री रमेश सिन्हा ह भारत के मुख्य न्यायाधीश के गरमागरम स्वागत करत कहिन के संवैधानिक मूल्य अउ न्यायिक निष्पक्षता बर उमन के अटूट निष्ठा पूरा न्यायिक समाज ला प्रेरित करथे। ई-स्मारिका के विमोचन छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी के बदलाव के जुग ला सुग्घर ढंग ले देखाथे। ये अकादमी ह राज्य में न्यायिक उत्कृष्टता बर एक आधारशिला रहे हे। अपन सामान्य सुरूआत ले लेके आधुनिक कानूनी प्रशिक्षण के केंद्र बने तक, एकर विकास ह एक मजबूत अउ सक्षम न्यायपालिका बर हमर संकल्प ला देखाथे। ये ई-स्मारिका सिरिफ एक डिजिटल कागज नोहे, बल्कि न्यायिक शिक्षा बर हमर समर्पण, बुनियादी ढांचा के विकास अउ डिजिटल जुग के संग चले के एक इतिहास आय।
अपन संबोधन में भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री सूर्यकांत ह कहिन के छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ह गणतंत्र के सबले कम उमर के संवैधानिक संस्था मन में ले एक आय। उमन छत्तीसगढ़ के इतिहास के बखान करत कहिन के छत्तीसगढ़ राज्य ला अक्सर भारत के विविधता के एक छोटे रूप के तौर में जाने जाथे। उमन प्रतीकात्मक रूप में कहिन के संवैधानिक अदालत मन ला लोकतंत्र के आधुनिक किला के रूप में देखे जा सकथे। ये मन कोनो इलाका के नहीं, बल्कि अधिकार मन के रक्षा करथें; कोनो भौतिक सीमा के नहीं, बल्कि ताकत ऊपर संवैधानिक सीमा मन के रक्षा करथें।
उमन ए बात ऊपर जोर दीन के हर एक न्यायाधीश ला अपन आप में एक संरक्षक बनके खड़ा होना चाही—सिद्धांत मन में अटल, आचरण में संयमित अउ संवैधानिक मूल्य मन के रक्षा में अडिग। उमन चेताइन के अदालत मन ला अपन आप ला अलग-थलग नहीं रखना चाही। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ला ‘आइवरी टॉवर’ (अइसन जगह जो जनता ले दूर हो) नहीं बनना चाही; एकर नजर बस्तर, सरगुजा अउ हर वो जिला तक होना चाही जिहां न्याय के गुहार लगाय जाथे। ओमन आगे कहिन के एक न्यायिक अकादमी ह सिरिफ एक प्रशिक्षण संस्था नोहे; ये वो जगा आय जिहां न्यायपालिका के भविष्य के ताकत ला गढ़े जाथे।
कार्यक्रम के समापन छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के माननीय न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री संजय के. अग्रवाल के धन्यवाद ज्ञापन के संग होइस। ए मउका में तेलंगाना उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री पी. सैम कोशी, विधि विभाग के प्रमुख सचिव, रजिस्ट्रार जनरल, रजिस्ट्री के अधिकारी, सीएसजेए (CSJA) के निदेशक अउ अधिकारी, रायपुर जिला न्यायालय के न्यायिक अधिकारी अउ उच्च न्यायालय के कर्मचारी मन उपस्थित रहिन।

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