धमतरी, सरी उम्मर दूसर मन के घर बनावत अउ हाड़-तोड़ मेहनत करत जिनगी जियईया धमतरी जिला के राजमिस्त्री शत्रुघन साहू बर उमर के ये पड़ाव अब परेसानी के विषय न ही, बल्कि आत्मसम्मान के प्रतीक बन गे हे। तहसील बेलरगांव के ग्राम पंचायत घठुला निवासी शत्रुघन साहू बछर 2011 ले श्रम विभाग म पंजीकृत निर्माण श्रमिक हें। ढलती उमर के सेती जब ओखर हाथ के ताकत कम होगे अउ नियमित मजदूरी करना कठिन होगे, तब ओखर आगू आजीविका के संकट खड़ा होगे। उही समय छत्तीसगढ़ सरकार के मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक पेंशन सहायता योजना ओखर जिनगी म एक मजबूत सहारा बनके आगू आइस।
अपन श्रमिक कार्ड के नवीनीकरण बर जब वो ह श्रम विभाग के कार्यालय पहुंचिस, तहाँ उहां संचालित सेवा संकल्प अभियान ओखर बर नया रद्दा खोल दीस। विभागीय अधिकारी मन ओला मार्गदर्शन देत बताइन के 60 बछर के उमर पूरा कर चुके अउ कम से कम 10 बछर ले मंडल म पंजीकृत निर्माण श्रमिक मन ल सरकार हर महीना 1500 रुपिया पेंशन देथें। सही समय म मिले ये जानकारी के बाद शत्रुघन साहू ह आवेदन करिस अउ प्रक्रिया पूरा होतेच ओखर खाता म पेंशन के राशि आना सुरू होगे।
अब तक शत्रुघन साहू ल ये योजना के तहत 16 किस्त सफलता पूर्वक मिल चुके हे। ये मासिक पेंशन ओखर बर सिरिफ एक सरकारी मदद भर नो हे, बल्कि ओखर जीवनभर के कड़ा मेहनत के सम्मान अउ बुढ़ापा के आर्थिक सुरक्षा के आधार हे। आज वो अपन रोजमर्रा के जरूरत बर दूसर मन ऊपर निर्भर नइ हे।
ये योजना के दूरदर्शिता सिरिफ इही बात तक सीमित नइ हे; एमा ये प्रावधान घलो हे के पेंशनधारी के दुखद मृत्यु होए के बाद ओखर पात्र जीवनसाथी ल 50 प्रतिशत पेंशन देहे जाही। ये नियम श्रमिक परिवार मन ल भविष्य के प्रति आश्वस्त करथे। सेवा संकल्प अभियान के मुख्य उद्देश्य इही हे के कोनो पात्र हितग्राही जानकारी के अभाव म अपन अधिकार ले वंचित झन रहय। शत्रुघन साहू के ये कहानी शासन के इही मंशा अउ अभियान के सार्थकता के जीवंत प्रमाण हे।
अपन ये सुरच्छित अउ आत्मनिर्भर जिनगी बर शत्रुघन साहू ह प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, जिला प्रशासन अउ श्रम विभाग के हृदय ले आभार व्यक्त करत कहिथें के मेहनत करइया श्रमिक के बुढ़ापा म सरकार के संग मिलना मोर बर बहुत बड़ बात हे। हर महीना मिलइया ये पेंशन मोर सबसे बड़का सहारा हे। ये सफलता के कहानी ये बात के प्रतीक हे के शासन के संवेदनशीलता जब सही समय म पात्र व्यक्ति तक पहुंचथे, त वो कइसे एक पूरा परिवार ला सम्मान अउ सुख के जिनगी दे सकथे।