किसान घलोक अपनावत हें एसएमआई तकनीक ले खेती करना
दंतेवाड़ा, पारंपरिक धान के संगे-संग अब मिलेट फसल जइसे रागी, कुल्थी, कोदो, मंडिया अऊ कोसरा के वैज्ञानिक अऊ नवाचार आधारित खेती तेजी ले बाढ़त हे। इही कड़ी म दंतेवाड़ा जिला के ग्राम पोटाली, पटेलपारा (विकासखंड कुआकोंडा) के किसान श्री देवा मांडवी “बड़ा कोसरा” के आधुनिक तकनीक ले खेती करके जिला के कृषि प्रगति के प्रेरक चेहरा बन गे हे।
जैविक उपचार ले फसल के गुणवत्ता म आइस सुधार
श्री मांडवी ह एसएमआई तकनीक अपनाके बड़का कोसरा के खेती म एक सफल मॉडल प्रस्तुत करे हे। निर्माण ऑर्गेनाइजेशन दंतेवाड़ा अऊ कृषि विभाग ह ओ ल तकनीकी मार्गदर्शन अऊ प्रशिक्षण देहे हे। वो ह 15-21 दिन के नर्सरी तैयार करके 30-30 सेंटीमीटर के दूरी म एकल पौध रोपाई करे हे। नियमित साइकिल वीडिंग, जीवामृत अऊ हांडी दवा जइसे जैविक उपचार ले फसल के गुणवत्ता म घलोक सुधार आए हे। अगस्त म रोपे गए फसल आज प्रति पौधा 30-40 बाली के संग उत्कृष्ट स्थिति म खड़े हे।
बड़का कोसरा के खेती होइस बहुत लाभदायक साबित
पाछू साल अरकू (आंध्र प्रदेश) म होए प्रशिक्षण अऊ फसल भ्रमण ह श्री मांडवी ल आधुनिक खेती के नवा समझ दीस, जेन ल वो ह अपन खेत म सफलतापूर्वक लागू करिस। आज ओखर खेत “मॉडल फार्म” के रूप म पहचाने जात हे। ए प्रक्रिया म निर्माण संस्था, कृषि विभाग अऊ जिला प्रशासन के महत्वपूर्ण सहयोग मिलीस। श्री मांडवी बताथे के एसएमआई तकनीक ले बड़का कोसरा के खेती करे के निर्णय मोर बर बहुत लाभदायक साबित होइस। तकनीकी सहायता ह मोला नवा दिशा देहे हे। मैं चाहत हंव के हमार क्षेत्र के आन किसान घलोक ए विधि ल अपनावंय, ताकि उंखर खेती जादा मजबूत अऊ लाभदायक बन सकय।
कोसरा के सफल रोपाई ले किसान मन के आय म होवत हे बढ़ोतरी
जिला के कई आन क्षेत्र जइसे छिंदनार, बुधपदर, पालनार, भटपाल, गुटोली, गुमलनार, बड़े गुडरा, मोखपाल, बड़े तुमनार, छोटे तुमनार, बुरगुम, अचेली, बालूद, गंजेनार, पाहुरनार आदि गांव मन म घलोक एसएमआई विधि ले कोसरा के सफल रोपाई जारी हे। भूमगादी समिति से किसान मन ल कोसरा चोप उपलब्ध कराया जात हे। निर्माण संस्था के फील्ड ऑफिसर श्री सुरेश कुमार नाग अऊ स्थानीय संसाधन मनखे मन सरलग किसान मन ल तकनीकी मार्गदर्शन देवत हें, जेखर से ग्रामीण क्षेत्र मन म ये फसल तेजी ले फैलत हे अऊ बेहतर उत्पादन के बर नवा अवसर खुलत हे। ये सफलता के कहानी दर्शाथे के तकनीक, प्रशिक्षण अऊ सरकारी सहयोग मिलके किसान मन के आय अऊ क्षेत्र के कृषि उन्नति के मार्ग प्रशस्त करथे।

