कोरबा, ग्रामीण इलाका मन मं वनोपज आधारित आजीविका कइ बछर ले महिला मन के जिनगी अऊ आर्थिक ढांचा के अटूट हिस्सा रहे हे। जंगल ले मिले वनोषधि अऊ आन वनोपज न केवल पारंपरिक ज्ञान के चिनहारी आय, बल्कि आज के बखत मं महिला स्वावलंबन, सेहत अऊ टिकाऊ रोजगार के मजबूत आधार घलोक बनत हे। जब संगठित प्रयास, प्रशिक्षण अऊ बाजार ले जुड़ाव मिलथे, तब इही वनोपज ह ग्रामीण महिला मन के जिनगी मं आत्मनिर्भरता अऊ सम्मान के नवा अध्याय लिखथे। इही सोच ल पूरा करत एक सशक्त उदाहरण कोरबा जिला के ग्राम डोंगानाला के ‘हरिबोल स्व-सहायता समूह’ आय। बछर 2006-07 मं यूरोपियन कमीशन परियोजना के तहत मंजूर ए पहल के माध्यम ले बने हरिबोल स्व-सहायता समूह ह आज महिला सशक्तिकरण के एक सफल मिसाल कायम करे हे। 12 महिला सदस्य मन के ये समूह ह ‘वनौषधि प्रसंस्करण केंद्र, डोंगानाला’ के सफल संचालन करत हें, जिहाँ कच्चा वनौषधि मन के संग्रहण, वैज्ञानिक तरीका ले प्रसंस्करण (सफाई-पिसाई) अऊ विपणन करे जाथे। समूह के महिला मन खुदे जंगल ले कच्ची जड़ी-बूटी सकेलथें अऊ तय मात्रा के मुताबिक ओला बनाथें।
तियार वनौषधि मन के मांग स्थानीय स्तर के संगे-संग प्रदेश स्तर मं घलोक सरलग बने हावय। समूह कोति ले बनाए गे दवाई मन के बिक्री एन.डब्ल्यू.एफ.पी. मार्ट बिलासपुर, रायपुर, दुर्ग, कांकेर, अंबिकापुर, जगदलपुर के संगे-संग संजीवनी केंद्र केवची (कटघोरा) अऊ कोरबा मं करत हे। एखरे संग प्रसंस्करण केंद्र मं नियुक्त बैद (वैद्य) कोति ले स्थानीय अऊ आसपास के इलाका के 1500 ले जादा मरीज मन के सफल इलाज करे जात हे। समूह के महिला मन हिंगवाष्टक चूर्ण, अजमोदादि चूर्ण, अश्वगंधादि चूर्ण, सितोपलादि चूर्ण, अविपत्तिकर चूर्ण, बिल्वादि चूर्ण, पुष्यानुग चूर्ण, त्रिफला चूर्ण, पंचसम चूर्ण, शतावरी चूर्ण, आमलकी चूर्ण, पायोकिल (दंतमंजन), सर्दी-खांसी नाशक चूर्ण, हर्बल कॉफी चूर्ण, महिला मित्र चूर्ण, हर्बल मधुमेह नाशक चूर्ण, हर्बल फेसपैक चूर्ण अऊ हर्बल केशपाल चूर्ण बनावत हें।
आर्थिक नजरिया ले हरिबोल स्व-सहायता समूह ह बड़का तरक्की करे हे। अभी के बखत मं समूह ह 20 लाख 52 हजार रूपिया के सालाना आय अर्जित करत हे अऊ हर बछर लगभग 50 लाख रूपिया के वनौषधि मन के बिक्री करे जात हे। एखर ले हर सदस्य ल औसतन 1.71 लाख रूपिया सालाना के कमाई होत हे। बीते दू बछर मं समूह के बिक्री अऊ मुनाफा दुनों दुगुना हो गे हे, जिहाँ पहिली सालाना लाभ 10.68 लाख रूपिया रहिस, जेहा अब बढ़के 20.52 लाख रूपिया हो गे हे।
वन मंडलाधिकारी कटघोरा ह बताइन के ये वनौषधि प्रसंस्करण केंद्र ह समूह ले जुड़े महिला मन ल स्थायी रोजगार, आत्मनिर्भरता अऊ आर्थिक सुरक्षा देवत हे। महिला मन अपन कमाई ले लइका मन के पढ़ई, दवाई-पानी, घर के जरूरत अऊ तिहार मन के खरचा ल आसानी ले पूरा करत हें। समूह के महिला मन मासिक अंशदान के माध्यम ले आपसी सहयोग, करजा व्यवस्था अऊ सामाजिक भागीदारी ल घलोक मजबूत करत हें।
हरिबोल स्व-सहायता समूह के उपलब्धि मन ल देस स्तर मं घलोक सराहे गे हे। बछर 2008 मं ‘फिलिप्स बहादुरी पुरस्कार’ मिले के संगे-संग भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन संघ (ट्राइफेड), भारत सरकार कोति ले बछर 2020-21 मं ‘वनधन विकास केंद्र, डोंगानाला’ ल राष्ट्रीय स्तर मं सबले जादा किसम के वनोत्पाद निर्माण अऊ विपणन बर पहिली पुरस्कार अऊ सबले जादा बिक्री बर दूसरा पुरस्कार ले सम्मानित करिस, जेला केंद्रीय मंत्री श्री अर्जुन मुंडा ह देहे रहिन।
हरिबोल स्व-सहायता समूह के ये सफलता ए बात के मजबूत परमान आय के जब महिला मन के पारंपरिक जानकारी ल आधुनिक प्रसंस्करण अऊ बाजार ले जोड़े जाथे, तब वनोपज ह नइ केवल आजीविका के साधन बनथे, बल्कि ग्रामीण विकास अऊ महिला सशक्तिकरण के मजबूत नेव घलोक तइयार करथे।
महिला सक्ति अऊ वनोपज के सफल संगम, हरिबोल स्व-सहायता समूह ह रचिस आर्थिक सशक्तिकरण के उदाहरण

