चले-फिरे म असमर्थ मुरलीधर बर पीएम आवास बनिस सहारा
कोरबा, मैं जब तक सक्षम रहेंव मोला झोपड़ी म जादा परेशानी नइ रहिस। पानी गिरे के गरेरा आवय हर मौसम म झोपड़ी म ही मोर अऊ मोर परिवार के समय बीतय। तभो ले खपरा वाले माटी के घर म रहना तकलीफदेह तो रहिस, फेर हाथ-पैर सही सलामत रथे त हर तकलीफ दूर करे जा सकत हे। मैं पानी-कांजी के दिन अवइया रहे त परेशानी ले बचे खातिर परिवार संग खपरा लहुटावत रहंव। बरसा के बाद ओदरे भिथिया मन के मरम्मत करत रहेंव अऊ तेज बारिश म घर के भीतर घुसरे पानी के धार ले बचे अऊ घर के सामान मन ल बचाय बर घलोक तमाम कोसिस करत रहेंव। कुछ साल पहिली अचानक मोर पांव ह जवाब देना शुरू कर दीस। माड़ी म असहनीय दरद के बीच चलना-फिरना घलोक मुश्किल हो गे।
ए हालात ह मोर चिंता बढ़ा दीस। बारिश ले पहिली हर साल मैं घर के छांधी म चढ़के खपरा लहुटात रहेंव, फेर अब अपन माड़ी के सेती ये सब करना आसान नइ हे। मैं तनाव म रहेंव के अब का होही? बरसा म फेर ओही परेशानी झेलना होही! मोर ए चिंता मन के बीच जब प्रधानमंत्री आवास योजना म मोर नाव आइस अऊ पहली किस्त मिलीस, त मैं ह कच्चा मकान ल तोड़वाके पक्का मकान बनाए म देरी नइ करेंव। आज मोर घर पक्का बन गए हे अऊ अभी तेज बारिश घलोक होवत हे… एखर बाद घलो मोला कोनो परेशानी नइ हे। में चैन से अपन घर म हंव।
कोरबा जिला के पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड के मल्दा गांव म रहइया मुरलीधर निर्मलकर ह बताइस के बीते साल प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभ ओला मिलीस। योजना के लाभ उठाके ओ ह झोपड़ी के जगा पक्का मकान बनवा लेहे हे। मुरलीधर ह बताइस के वोखर उमर 65-66 के हो गए हे। ए बीच माड़ी म दरद होए लगे हे अऊ कहूं आना-जाना घलोक मुश्किल हो गए हे। दरद के सेती वो ए चिंता म रहिस के बरसात म झोपड़ी म होवइया परेशानी मन ले कइसे बांचही, काबर के अब तो वो खपरा लहुटाए बर छांधी म चढ़ घलो नइ सकय।
मुरलीधर कथे – “मैं सौभाग्यशाली हंव के मोर नाव पीएम आवास योजना म आइस अऊ मैं ह बिना देर करे राशि मिलतेच अपन मकान पूरा बनवा लेंव।” ओखर पत्नी लच्छमनिया बाई बताथे – “झोपड़ी म बारिश के दिन म सबले जादा परेशानी होत रहिस। कच्चा भिथिया ओदर जाए। घर के भीतर पानी चूहे ले जगा-जगा भोंडू हो जाए। मोर काम घलोक बाढ़ जात रहिस।” दुनों प्रधानमंत्री आवास योजना के अपन मकान बर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी अऊ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करत कहत हें के अब पक्का मकान बन जाय के बाद बारिश म घलोक हमन चैन ले रहि पात हन, हमला कोनो तकलीफ नइ हे।
पहिली बरसा म मुसीबत बाढ़ जाए, अब अराम हे

