राजनांदगांव/ जिला के मोखला अउ भर्रेगांव के महिला मन ह खेती-किसानी म नवा इतिहास रच देहे हें। इहां के ‘प्रयास’ अउ ‘उन्नति’ स्वयं सहायता समूह के दीदी मन ह रसायनिक खाद ल छोड़के अब ‘जैविक खेती’ ल अपन हथियार बना लेहे हें। एखर ले न सिरिफ गाँव के तस्वीर बदलत हे, भलुक महिला मन लखपति घलो बनत हें।
1. घर म ही बनावत हें खाद अउ दवई:
राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन ले ट्रेनिंग लेके, ए ‘कृषि सखी’ मन अब बाजार के महंगा दवई नई खरीदंय। ये मन खुद घर म जीवामृत, बीजामृत, ब्रह्मास्त्र, निमास्त्र अउ दशपर्णी अर्क जइसे जैविक दवई बनावत हें। एखर ले किसान मन के खर्चा कम हो गे हे अउ खेत ले जहर घलो कम होवत हे।
2. लाखों के कमई:
कृषि विभाग ह ए महिला मन के काम ल देख के खुश होके 375 एकड़ म खेती बर दवई सप्लाई करे के जिम्मा इही ल देहे हे। ए दीदी मन ह खरीफ सीजन म जैविक दवाई बेच के हर समूह ह लगभग 1 लाख रुपिया के कमई करे हें।
3. दूसर गाँव म घलो सप्लाई:
ये समूह ह धामनसरा, ढोडिया, मोखला, अउ भर्रेगांव जइसन कई गाँव के किसान मन ल 1200 लीटर ब्रह्मास्त्र अउ निमास्त्र बाँटे हें।
का कहिथे दीदी मन?
बीआरसी समूह के अध्यक्ष श्रीमती नीतू चंद्राकर बताथे के ए काम ले गाँव के महिला मन ल रोजगार मिलत हे अउ लोगन ल जहर वाला खाना ले मुक्ति मिलत हे। उन चाहत हें के सबो दीदी मन ए अभियान ले जुड़ंय।