ड्रिप इरिगेशन, मल्चिंग अऊ बैग्यानिक खेती ले बाढ़िस कमाई
स्व-सहायता समूह ले जुड़के आत्मनिर्भरता के नवा कहानी लिखत हें गांव-घर के माइलोगन मन
बलरामपुर, छत्तीसगढ़ म माइलोगन मनके मजबूती अऊ गांव-घर के आजीविका बढ़ाए के दिसा म स्व-सहायता समूह मनके भूमिका सरलग मजबूत होवत हे। राज्य सरकार के कइ किसम के आजीविका बढाए के उदीम अऊ राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम ले गांव-घर के माइलोगन मन सिरिफ आर्थिक रूप ले मजबूत नई होवत हें, भलुक अपन परिवार अऊ समाज बर प्रेरणा के सोत घलो बनत हें। अइसनहे एक सुग्घर प्रेरणा देवइया कहानी बलरामपुर जिला के राधाकृष्णनगर के श्रीमती लतिका सिदार के हे, जेमन खेती-किसानी के आधुनीक तकनीक मनला अपनाके अपन चिन्हारी एक सफल किसान अऊ लखपति दीदी के रूप म बना चुके हें।
राधाकृष्ण स्व-सहायता समूह ले जुड़े के बाद श्रीमती लतिका के जिन्दगी म सुग्घर बदलाव के सुरूआत होए हे। समूह के माध्यम ले ओमनला सामुदायिक संसाधन व्यक्ति (सीआरपी) के रूप म काम करे के अवसर मिले हे, जेकर से ओखर गियान अऊ हुनर बाढ़े हे। कइ किसम के सीख-सिखाव कार्यक्रम म सामिल होके ओ ह आधुनीक खेती, ब्यापार बढाए अऊ कमाई के नवा साधन मनले जुड़े नवा तकनीक के जानकारी पाए हे।
सीख-सिखाव म श्रीमती लतिका हा ड्रिप इरिगेशन, मल्चिंग अऊ बागवानी खेती के नवा तरीका मनला सीखिन अऊ ओला अपन एक एकड़ के खेती के भुइँया म उपयोग करिन। स्व-सहायता समूह ले मिले करजा के मदद ले ओमन खेत म ड्रिप इरिगेशन सिस्टम लगवाईन अऊ मल्चिंग तकनीक के उपयोग सुरू करिन। एखर नतिजा ये होईस के मिर्चा, बरबट्टी संग दूसर बागवानी फसल मनके पैदावार बाढ़िस, सिंचाई बर पानी के बचत होईस अऊ खेती के खरचा म घलो बड़ कमी आईस।
खेती के आधुनीक तकनीक मनके सुग्घर उपयोग ले श्रीमती लतिका के कमाई म बड़ बढ़ोतरी होईस। पहिली के तुलना म ओखर कमई हा दुगुना होगे अऊ खेती संग दूसर काम-बूता ले ओखर बछरभर के कमाई एक लाख रुपिया ले जादा पहुंच गे। आज ओ ह अपन परिवार के जरूरत मनला अउ बने ढंग ले पूरा करे के संगे-संग लइका मनके सिक्षा अऊ आघू के दिन बर बचत घलो करत हे।
श्रीमती लतिका के कहना हे के स्व-सहायता समूह हा ओमनला आत्मविश्वास अऊ आघू बढ़े के अवसर दीस। ओखर सपना हे के ओ अपन खेती ला पूरा तरीका ले जैविक रूप दे सकय, जेकर से बने फसल मिले के संगे-संग परयावरण ला घलो बचाय म मदद मिल सकय।
श्रीमती लतिका सिदार के ये सफलता हा देखाथे के सही रस्ता, सीख-सिखाव अऊ पैसा-कउड़ी के सहयोग मिले ले गांव-घर के माइलोगन मन आत्मनिर्भर बनथें अउ गांव के आर्थिक स्थिति ला घलो नवा दिसा दे सकथें। आज छत्तीसगढ़ के हजारों माइलोगन मन स्व-सहायता समूह मनके माध्यम ले खुद के रोजगार, खेती, गरु-बछरू पालन अऊ छोटे उद्योग मनले जुड़के आत्मनिर्भरता के नवा इतिहास लिखत हें। लतिका के ये उपलब्धि हा माइलोगन मनके मजबूती, आधुनीक खेती अऊ समाज के विकास के एक सुग्घर मिसाल आय।