बांसकला ले गुथिन आत्मनिर्भरता के कहानी
धमतरी, जिला के गंगरेल ग्राम पंचायत के रहवइया श्रीमती किरण कंडरा ह अपन मेहनत, लगन अऊ नवाचार ले छत्तीसगढ़ के पारंपरिक बांसकला ल एक नवा पहिचान देहे हे। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना ‘मनरेगा’ (Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Scheme ‘MGNREGA’) के अंतर्गत काम करत उमन छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ (Chhattisgarh State Rural Livelihood Mission ‘Bihan’) ले जुड़के बांस ले कइ ठन जिनिस बनाए ल सुरू करिस अऊ आज ग्रामीण महिला मन बर स्वावलंबन के मिसाल बन गए हे।
श्रीमती किरण कंडरा ह बांसकला जइसे पारंपरिक हस्तशिल्प काम म रुचि लेत बिहान समूह के सहायता ले प्रशिक्षण, कच्चा माल, विपणन अऊ वित्तीय सहायता प्राप्त करिस। ए सहयोग के माध्यम ले वो ह बांस के टुकनी, सूपा, टिफिन डिब्बा, पर्रा, बिजना, दीया अऊ बहुत अकन सजावटी चीज बनाना चालू करिस। बिहान समूह ले मिले मार्गदर्शन अऊ प्रोत्साहन के चलते वो ह अपन उत्पाद मन ल स्थानीय हाट-बाजार, मेला अऊ राज्य स्तरीय प्रदर्शनी मन म बिक्री बर प्रदर्शित करिस।
वोखर हस्तनिर्मित बांस उत्पाद मन ल ग्रामीण क्षेत्र मन के संगे-संग शहरी ग्राहक मन ले घलोक सराहना मिले लगिस। एखर से वोखर मासिक आय म लगभग 10,000 रूपिया ले 15,000 रूपिया तक के बढ़ोतरी होए हे। आर्थिक रूप ले सुदृढ़ होए के संगे-संग वो ह आन ग्रामीण महिला मन ल घोक आगू बढ़ाए बर भूमिका निभाए हे। अभी हाले म श्रीमती कंडरा के काम हरित अऊ स्थानीय संसाधन आधारित उद्योग मन ल बढ़ावा देहे, महिला स्वावलंबन अऊ आत्मनिर्भर भारत अभियान के दिशा म उल्लेखनीय साबित होवत हे।
श्रीमती किरण कंडरा ह अपन लगन अऊ मेहनत ले ये साबित करे हे के कहूं परंपरा ल नवाचार ले जोड़े जाय त वो न केवल जीविकोपार्जन के सशक्त माध्यम बन सकत हे, बल्कि समाज बर सम्मान अऊ गौरव के कारन घलोक बनथे। आज ओ मन आत्मनिर्भरता अऊ महिला सशक्तिकरण के मिसाल बनके आन महिला मन ल हुनर आधारित स्वरोजगार अपनाए बर प्रेरित करत हें।
श्रीमती किरण कंडरा बनिस ग्रामीण महिला मन के प्रेरणा

