‘मोर गांव मोर पानी’ अभियान ले 45 परिवार मन के जिनगी म आइस बड़का बदलाव

जल संरक्षण के कोसिस ले पांच एकड़ ले जादा खेत म लहलहाइस फसल

मनेन्‍द्रगढ़-चिरमिरी, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के दूरदर्शी पहल ‘मोर गांव मोर पानी’ अभियान ह आज गांव-गांव म जल आत्मनिर्भरता के नवा कहानी लिखत हे। इही अभियान के तहत एमसीबी जिला के मनेन्द्रगढ़ जनपद पंचायत के ग्राम मुख्तियारपारा म कइ बछर ले परे एक ठन अनुपयोगी स्टापडेम ला नवा जीवन मिले हे। बोहात पानी ला सहेजे के ए सामूहिक कोसिस ह न केवल पानी के किल्लत ला दूर करिस, बल्कि खेती-किसानी, पशुपालन अऊ ग्रामीण जीवन ला नवा रद्दा घलोक देखाए हे।

जब जर्जर स्टापडेम बन गे रहिस समस्या
मुख्तियारपारा गांव म कइ बछर पहिली एक ठन स्थानीय नाला म स्टापडेम बनाय गे रहिस, जेहा समय के संग जर्जर हो गे रहिस। कचरा अऊ माटी जमा होय के सेती ओकर पानी रोके के छमता सिराय के बरोबर हो गे रहिस। जाड़ के दिन बीते के बाद जइसे नाला के बहाव कम होवय, गांव वाला मन ला रोज के काम बर घलोक पानी नई मिल पावत रहिस। खेत के सिंचाई तो दूर, कोठार के गरुआ-बछरू मन बर घलोक पानी के अकाल पर जाय।

ग्राम सभा ले निकलीस समाधान के रद्दा
पाछू वित्तीय बछर म आयोजित ग्राम सभा म ‘मोर गांव मोर पानी’ अभियान ऊपर गोठ-बात होइस। गांव वाला मन ह एकजूट हो के खराब परे स्टापडेम ला सुधारे के प्रस्ताव रखिन। सामुदायिक जलभराव क्षेत्र निर्माण अऊ भूमि सुधार के काम ला सबो के सम्मति ले मंजूरी मिलिस। महात्मा गांधी नरेगा के तहत लगभग 4.95 लाख रुपिया के प्रशासकीय स्वीकृति देहे गिस अऊ ग्राम पंचायत मुख्तियारपारा ला निर्माण एजेंसी बनाय गिस। तकनीकी देखरेख म ए काम ह समय के भीतर पूरा होइस।

पानी ले समृद्ध होइस गांव के भविष्य
स्टापडेम के सफाई अऊ भूमि सुधार के काम के बाद अब ओमा पहिली ले भरपूर पानी रुक पात हे। एखर सीधा फायदा ग्राम सलका अऊ सिरौली के लगभग 45 परिवार मन ला मिलत हे। आज इहां निस्तारी, पशुपालन अऊ घर के काम बर भरपूर पानी हे। आसपास के वाटर लेवल (जलस्तर) म घलोक सुधार होय हे। पानी के सुविधा होय ले 8 ले 10 परिवार मन ह रबी फसल के संग साग-भाजी उगाय के काम घलोक सुरू कर दे हें अऊ पांच एकड़ ले जादा खेत के सिंचाई अब हो पावत हे। ए कहानी ह बताथे के जब सरकार के योजना, ग्राम सभा के भागीदारी अऊ मेहनत एक संग मिलथे, तब बेकार परे ढांचा घलोक तरक्की के आधार बन जाथे।

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