CHHATTISGARHI NEWS: छत्तीसगढ़ म पचौली के सुगंधित अउ औषधीय खेती किसान मन के कमई बढ़ाय के नवा जरिया बनत हे। एक पइत पौधा तियार होए के बाद उही पौधा ले नवा पौधा तियार करे जा सकथे, जेकर से किसान मन ला घेरी-बेरी महंगी बीजा बिसाए के जरूरत नइ परय अउ खेती के लागत कम होथे।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के अगुवई अउ वन मंत्री श्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन म छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा अउ औषधि पादप बोर्ड कोति ले पचौली खेती के प्रायोगिक परियोजना शुरू करे गे हे। राज्य म 8 एकड़ जमीन म ए परियोजना चलाय जात हे। परिणाम अच्छा मिले म किसान मन ला बड़का पैमाना म पचौली खेती बर प्रोत्साहित करे जाही।

पचौली के पाना ले निकलइया तेल के देश-विदेश म मांग हे। ए तेल के उपयोग इत्र, परफ्यूम, साबुन, सौंदर्य प्रसाधन, अरोमाथेरेपी अउ प्राकृतिक कीट-रोधक उत्पाद म होथे। एक एकड़ म करीब 30 किलो तेल उत्पादन अउ 6 हजार रुपिया प्रति लीटर तक के बाजार भाव के हिसाब ले किसान पहिली साल खर्चा निकालके करीब 1 ले 1.5 लाख रुपिया तक शुद्ध मुनाफा कमा सकथें। एक साल म 2 ले 3 बेर फसल के कटाई घलो करे जा सकथे।
पचौली के खेती म जैविक खाद, खासकर गोबर, गोमूत्र अउ गुड़ ले बने जीवामृत के उपयोग लाभदायक होथे। ए फसल के रोपाई बर जुलाई-अगस्त के समय उपयुक्त हे। ड्रिप सिंचाई अउ मल्चिंग ले उत्पादन अउ गुणवत्ता बेहतर होथे। रोपाई के 4 ले 6 महीना बाद पहिली कटाई करे जाथे अउ पत्ती ले भाप आसवन विधि ले तेल निकाले जाथे।
पचौली ला खुले खेत के अलावा फलदार बगीचा, नारियल अउ सुपारी के बगीचा के बीच खाली जगा म घलो लगाय जा सकथे। किसान कहूं 30 ले 40 एकड़ के क्लस्टर म खेती करथें, त बड़े कंपनी मन सीधा खेत ले उपज खरीदे बर आगे आ सकथें। औषधि पादप बोर्ड कोति ले किसान मन ला तकनीकी मार्गदर्शन, प्रशिक्षण अउ विपणन सहायता घलो उपलब्ध कराए जात हे।
पचौली के खेती ले किसान मन के कमई बढ़ाय के नवा रद्दा खुलिस
Patchouli Farming in Chhattisgarh