महासमुंद के किसान मन धान के खेती के संग करत हें मछली पालन, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना ले बदलगे जिनगी

महासमुंद, कभी सिरिफ धान के खेती ऊपर निर्भर रहइया महासमुंद जिला के किसान मन अब मछली पालन ल कमाई अउ रोजगार के नया जरिया बना लेहे हें। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना ले जिला के करीब 150 किसान मछली पालन ले जुड़के अपन आमदनी ल बढ़ावत हें। कोनो तालाब बनाके मछली पालन सुरू करिन त कोनो हैचरी अउ पाउंड लाइनर यूनिट लगाकर एला कारोबार के रूप दिन। योजना के तहत मिलइया अनुदान ले किसान मन बर ये कारोबार म निवेश करना आसान होगे हे। बिरकोनी के किसान दिनेश चन्द्राकर के कहानी ये बदलाव के मिसाल हे। पारंपरिक खेती म बाढ़त लागत ल देखत ओ ह मछली पालन ल कमाई के नवा साधन बनाय के फैसला करिस। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत करीब 7.50 लाख रुपिया के लागत ले एक हेक्टेयर म तालाब तैयार कराइस। एखर बाद करीब 14 लाख रुपिया के लागत ले 20 हजार वर्गफुट म मछली हैचरी स्थापित करिस। सरकारी अनुदान ले ओला अपन कारोबार के विस्तार करे म मदद मिलिस। दिनेश बताथे के हैचरी म मछली के बच्चा तैयार करके तालाब म डाले जाथे। करीब 8 ले 9 महीना म 15 टन तक मछली तैयार हो जाथे। एक किलो मछली तैयार करे म करीब 70 ले 80 रुपिया के लागत आवत हे, फेर बाजार म ये 120 ले 150 रुपिया प्रति किलो तक बिक जाथे। तैयार मछली ल मछुआरा मन के माध्यम ले बाजार तक पहुंचाए जाथे। एखर से ओला खेती के संग बढ़िया उपरहा कमाई होत हे। बकमा के हिमांशु चंद्राकर घलो योजना के लाभ लेकर मछली पालन ल कारोबार के रूप दीन। ओमन करीब 28 लाख रुपिया के लागत ले दू पाउंड लाइनर यूनिट तैयार करायिन। सरकार ले ओला 60 प्रतिशत अनुदान मिलिस। हिमांशु के अनुसार सबो खर्चा निकाले के बाद ओला सालाना करीब 3 ले 4 लाख रुपिया के बचत हो जाथें। अब मछली पालन ओखर परिवार के कमाई के मजबूत अउ स्थायी जरिया बन गए हे। मछली पालन के असर सिरिफ किसान के आमदनी तक सीमित नइ हे। एखर से ग्रामीण क्षेत्र म स्थानीय रोजगार घलो बढ़ गए हे। बिरकोनी म मछली पालन ले जुड़इया मजदूर मन ल अब गांवे म ही नियमित काम मिलत हे। मजदूर मन के मुताबिक पहिली रोजगार के तलाश म दूसर जगा जाना परत रहिस, फेर मछली पालन बाढ़े ले गांव म ही बछरभर काम मिलत हे। करीब 9 हजार रुपिया महीना के कमई से ओला परिवार के खर्चा चलाए म मदद मिलत हे। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के जरिये जिला म मछली पालन ले जुड़इया बुनियादी ढांचा ल घलो विस्तार मिलत हे। नवा तालाब, बायोफ्लॉक यूनिट, हैचरी, कोल्ड स्टोरेज अउ मछली दाना निर्माण जइसे गतिविधि ल बढ़ावा देहे जात हे। योजना के तहत महिला, अनुसूचित जाति अउ अनुसूचित जनजाति वर्ग के हितग्राही ल 60 प्रतिशत तथा सामान्य वर्ग के हितग्राही ल 40 प्रतिशत तक अनुदान के प्रावधान हे। महासमुंद म किसान ये मदद के लाभ लेकर मछली पालन के संग हैचरी अउ मछली दाना निर्माण जइसे गतिविधि ले घलो जुरत हें।

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