आलेख – छगन लोन्हारे
उप संचालक (जनसंपर्क विभाग)
अनुवाद – गुरतुर गोठ
रायपुर, बसंत पंचमी 23 जनवरी ले नवा रायपुर के पुरखौती मुक्तांगन परिसर म तीन दिन के रायपुर साहित्य उत्सव के आयोजन करे जात हे। जेमा देश भर के 100 ले जादा नामी साहित्यकार मन सामिल होवत हें। ए तीन दिन के उत्सव ले छत्तीसगढ़ ल एक ठन नवा पहचान मिलही। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के कहना हे के छत्तीसगढ़ राज्य के स्थापना के 25 बछर पूरा होए म पूरा प्रदेश रजत महोत्सव मनावत हे। रायपुर साहित्य उत्सव उही कड़ी के एक ठन महत्वपूर्ण अध्याय हरे। ए उत्सव न सिरिफ छत्तीसगढ़ के भलुक पूरा देश के बड़का साहित्यकार मन ल एक साझा मंच देही। मुख्यमंत्री ह भरोसा जताइस के ए आयोजन छत्तीसगढ़ ल साहित्यिक दुनिया म एक नवा पहचान देही अउ आम जनता ल साहित्य, लेखन अउ पढ़ाई-लिखाई कोति प्रेरित करही। साहित्य महोत्सव के दौरान साहित्य चर्चा, खुला गोठ-बात, अउ अभी के विषय मन ऊपर विचार-विमर्श होही। साहित्य महोत्सव ल लेके आम लोगन म भारी उत्साह देखे बर मिलत हे।
आज जब सोशल मीडिया के हल्ला-गुल्ला म ज्ञान के बात अक्सर सूचना के शोर म दब जाथे। अइसन समय म साहित्य उत्सव एक ठीन महत्वपूर्ण मउका देथे। जिहां विचार-विमर्श के बीच गोठ-बात के संस्कृति जिंदा रहिथे। सिरजन उही जगा जनम लेथे, जिहां मन खुला होवय अउ कथा उही जगा आकार लेथे जिहां मनखे अपन सत्य ले गोठियाए के हिम्मत रखथे। साहित्य महोत्सव के लोगो म लिखे ‘‘आदि ले अनादि’’ तक वाक्य साहित्य के ओ अटूट यात्रा ल देखाथे, जेमा आदिकालीन रचना मन ले लेके सरलग विकसित होवत आधुनिक साहित्य तक सबो रूप समाय हे। साहित्य कालातीत हे, वो समय, समाज, भाषा अउ पीढ़ी मन ल जोड़ के चलइया सरलग धारा हरे। तीन दिन तक पुरखौती मुक्तांगन म साहित्यिक गोठ-बात, किताब विमोचन, विचार-मंथन, सांस्कृतिक प्रस्तुति अउ कला-प्रदर्शनी के जीवंत केंद्र बनही। ए आयोजन छत्तीसगढ़ ल राष्ट्रीय साहित्यिक नक्शा म एक मजबूत पहचान देवाए के दिशा म महत्वपूर्ण कदम माने जात हे।
रायपुर साहित्य उत्सव पूरा छत्तीसगढ़ बर सांस्कृतिक गर्व के विषय हरे काबर के एमा राज्य के हजारो साल पुराना साहित्यिक जड़, आदिवासी परंपरा, सामाजिक समरसता अउ आधुनिक रचनात्मक दृष्टि सबो के सुंदर, सार्थक अउ कलात्मक संगम दिखही। छत्तीसगढ़ के साहित्यिक यात्रा आदि ले अनादि तक स्थिर, जीवंत अउ समृद्ध रहे हे, अउ आघू घलो इही धारा म सरलग विकास के नवा कहानी लिखत रइही। साहित्य उत्सव म कुल 11 सत्र सामिल होही, एमा 5 समानांतर सत्र, 4 सामूहिक सत्र अउ 3 संवाद सत्र आयोजित करे जाही जेमा साहित्यकार अउ भाग लेवइया मन के बीच सीधा गोठ-बात अउ विचार-विमर्श होही। रायपुर साहित्य उत्सव साहित्य, विचार अउ संस्कृति के संगम के तिहार हरे, एमा युवा, शिक्षक, लेखक अउ आम पाठक मन के भागीदारी रइही। नवा पीढ़ी ल साहित्य, विचार अउ संस्कृति ले जोड़ना ए उत्सव के मुख्य उद्देश्य हरे।
उत्सव के बेरा म पुस्तक मेला के घलो आयोजन करे जात हे, जेमा लगभग 40 ठन स्टॉल लगाए जाही। एमा देशभर के नामी प्रकाशक मन के किताब देखाय जाही अउ बेंचे बर घलो उपलब्ध रइही। रायपुर साहित्य उत्सव म खास करके चाणक्य नाटक के मंचन करे जाही जेन भारतीय बौद्धिक परंपरा अउ नाट्य कला के जबरदस्त उदाहरण होही। एकर संगे-संग लोकनृत्य, लोकगीत अउ छत्तीसगढ़ी सांस्कृतिक प्रस्तुति के माध्यम ले दर्शक मन ल राज्य के जीवंत लोक संस्कृति ले रूबरू कराए जाही। नामी कवि मन के उपस्थिति म कवि सम्मेलन आयोजित होही, जिहां उंकर दमदार रचना सुनइया मन ल साहित्यिक रस के आनंद देही। संगे-संग पत्रकार, विचारक अउ सामाजिक कार्यकर्ता मन के साथ खुला संवाद सत्र आयोजित करे जाही, जेमा अभी के सामाजिक-सांस्कृतिक विषय मन ऊपर सार्थक चर्चा होही।
ए आयोजन छत्तीसगढ़ के साहित्यिक चेतना, विचार परंपरा अउ सांस्कृतिक आत्मा ल राष्ट्रीय संवाद ले जोड़े के एक मजबूत पहल के रूप म उभरत हे। रायपुर साहित्य उत्सव 2026 न सिरिफ लेखक अउ पाठक मन के बीच पुल बनही, बल्कि नवा पीढ़ी ल साहित्य, संस्कृति अउ विचार के प्रति संवेदनशील बनाए के घलो माध्यम बनही। साहित्यिक चर्चा, रचनात्मक अभिव्यक्ति अउ सांस्कृतिक विविधता ले भरे-पूरे ए तीन दिन के उत्सव नवा रायपुर ल देश के प्रमुख साहित्यिक केंद्र मन के श्रेणी म स्थापित करे के दिशा म एक ठन महत्वपूर्ण अउ यादगार अध्याय साबित होही।
छत्तीसगढ़ के साहित्यिक आत्मा अउ लोक स्मृति म बसे भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार ले सम्मानित स्वर्गीय विनोद कुमार शुक्ल के एक रचना –
हताशा ले एक झन मनखे बइठ गे रहिस,
मैं मनखे ल नइ,
हताशा ल जानत रहेंव,
हमन दूनो संग चलेन,
संग चले ल जानत रहेंन
इही वो साहित्य हरे जेन मनखे ल धीरज देथे अउ संग चले के सभ्यता सिखाथे।
साहित्य उत्सव ले छत्तीसगढ़ ल मिलही नवा पहचान

