2.8 करोड़ पौधा मन ह बदल दीस गाँव के अर्थव्यवस्था के तस्वीर
रायपुर, जड़ी-बूटी (औषधीय) पौधा मन के खेती किसान मन बर कम खरचा म जादा मुनाफा के एक ठन बढ़िया रद्दा बनत हे, जेकर ले गाँव म खुशहाली आवत हे। वन विभाग डहर ले किसान मन ल खेती बर मुफत म पौधा बाँटे जात हे, उहें घर के बारी अउ सहर मन म ‘हर्बल गार्डन’ बनाय बर घलो मुफत म पौधा देहे जात हे। एकर संग म जंगल मन म घलो ये पौधा मन ल लगाय गे हे, जेकर ले हरियाली अउ जैव विविधता ल बढ़ावा मिलत हे। किसान मन अब परम्परागत खेती ल छोड़ के ये कोति आगू बढ़त हें। सरकार घलो मदद, ट्रेनिंग अउ तकनीकी सहायता दे के ये क्षेत्र ल बढ़ावा देवत हे।
वन विभाग के तहत छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा अउ औषधि पादप बोर्ड के कोसिस ले प्रदेश म औषधीय पौधा मन के पैदावार अउ उपयोग ल नवा दिशा मिले हे। बछर 2025-26 म बोर्ड ह राज्य के 11 ठन नर्सरी मन के माध्यम ले 9 किसिम के लगभग 2.8 करोड़ औषधीय पौधा तइयार करके एक बड़े सफलता पाय हे। वन मंत्री श्री केदार कश्यप ह ये काम बर बोर्ड के अध्यक्ष श्री विकास मरकाम अउ उपाध्यक्ष श्री अंजय शुक्ला ल बधाई देहे हें।

औषधि पादप बोर्ड ह ये पौधा मन म वच, ब्राह्मी, सतावर, गुंजा, अनंतमूल, मंडूकपर्णी, स्टीविया, कुलंजन अउ सर्पगंधा जइसे काम के पौधा मन ल सामिल करे हे। एकर उपयोग स्वास्थ्य, कमाई बढ़ाय अउ पर्यावरण ल बचाय बर करत हे। बोर्ड डहर ले तइयार ये पौधा मन ल सरकारी योजना मन के माध्यम ले मनखे मन तक पहुँचाए जात हे। ये काम म बोर्ड ले जुड़े गैर-सरकारी संस्था मन के घलो बड़े हाथ हे। पौधा मन के बढ़िया क्वालिटी बर बने बीजा अउ ‘मदर प्लांट’ के उपयोग करे गीस, जेकर ले पौधा मन के बाचे के सक्ति जादा रहिस।
बोर्ड ह ये घलो पक्का करे हे के पौधा मन पूरा ‘जैविक’ (ऑर्गेनिक) तरीका ले तइयार होवंय। एकर बर रासायनिक खाद के बलदा सिरिफ़ बायो फर्टिलाइजर, गोबर खाद अउ जीवामृत के प्रयोग करे गीस। एकर ले पौधा मन ले मिलइया सामान के क्वालिटी बढ़िया हो गीस अउ बजार म ओकर माँग घलो बाढ़ गे। ये पहल ले किसान अउ गाँव के मनखे मन ल जादा कमाई के मौका मिलत हे। जड़ी-बूटी के खेती अब रोजगार अउ आत्मनिर्भरता के नवा साधन बनत हे।
औषधि पादप बोर्ड ह आघू के बछर 2026-27 बर घलो तैयारी सुरु कर दे हे। ये बछर लगभग 1 करोड़ नवा पौधा तइयार करे के लछ्य रखे गे हे। ये सफलता बतावत हे के सही योजना, ट्रेनिंग अउ सहयोग ले जड़ी-बूटी के खेती के माध्यम ले मनखे मन के आय बढ़ाय जा सकत हे अउ प्रदेश ल आर्थिक अउ पर्यावरणीय रूप ले मजबूत बनाय जा सकत हे।

