रायपुर साहित्य उत्सव 2026 : वाचिक परम्परा म साहित्य ऊपर होइस सार्थक परिचर्चा

वाचिक परम्परा सिरिफ अतीत के धरोहर नो हे, भलुक ए ह समकालीन साहित्य अउ समाज ल समझे के एक ठन सशक्त कुंजी ए

रायपुर, रायपुर साहित्य उत्सव 2026 के अंतर्गत “आदि ले अनादि तक” थीम ऊपर आयोजित साहित्यिक कार्यक्रम के लड़ी म लाला जगदलपुरी मण्डप म दूसरा सत्र के आयोजन करे गीस। ए सत्र म “वाचिक परम्परा म साहित्य” विषय ऊपर गहिर, विचारोत्तेजक अउ सार्थक परिचर्चा  होइस, जेमा भारतीय साहित्य के मौखिक परम्परा मन के ऐतिहासिक भूमिका अउ समकालीन प्रासंगिकता ऊपर गोठ-बात करे गीस।
ए परिचर्चा म नामचीन साहित्यकार श्री रुद्रनारायण पाणिग्रही, श्री शिव कुमार पांडे, डॉ. जयमती अउ श्री सुधीर पाठक ह अपन विचार साझा करिन। सत्र के अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. महेन्द्र मिश्र ह करिन। वक्ता मन ह अपन संबोधन म वाचिक परम्परा के अलग-अलग विधा अउ ओखर साहित्यिक महत्व ऊपर विस्तार ले प्रकाश डालिन।
अध्यक्षीय उद्बोधन म डॉ. महेन्द्र मिश्र ह कहिन के वाचिक परम्परा सिरिफ अतीत के धरोहर नो हे, भलुक ए ह समकालीन साहित्य अउ समाज ल समझे के एक ठन सशक्त कुंजी ए। उमन कहिन के बदलत समय म वाचिक परम्परा मन के संरक्षण, दस्तावेजीकरण अउ नई पीढ़ी तक ओखर संवेदनशील हस्तांतरण आज के एक ठन बड़का जरूरत बन गे हे।
वक्ता मन ह वाचिक परम्परा ल भारतीय साहित्य के मूल धारा बतावत कहिन के लोकगीत, लोककथा, कहावत, मिथक अउ जनश्रुति मन जुग-जुग ले समाज के सांस्कृतिक स्मृति ल सहेज के रखत आय हे। उमन कहिन के लिखित साहित्य के आवे के पहिली वाचिक परम्परा ही ज्ञान, इतिहास, जीवन मूल्य अउ सामाजिक अनुभव मन ल पहुंचाये के मुख्य माध्यम रहीस हे, जे ह पीढ़ी दर पीढ़ी सांस्कृतिक चेतना ल जिंदा रखे हे।

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