तुतारी –भरोसा

तुतारी –

काश ! ये भरोसा आम जनता कर पातिस।

अउ काश ! ये व्यवस्था सिरिफ अउ सिरिफ आम जनता बर नइ होके, सबो बर हो पातिस।

अब तो हर मनखे के मन म इहीच भाव पनपथे –

काकर करिन भरोसा ?

काबर करिन भरोसा ?

अउ कइसे करिन भरोसा ?

लउछरहा..